मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भविष्य की चिंता में वर्तमान को खो देना और पैसे के पीछे भागते हुए स्वास्थ्य और रिश्तों को भूल जाना आज के समय की सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग अपने भविष्य को सुरक्षित और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की अंधी दौड़ में शामिल हैं। आने वाले कल की सुरक्षा की चिंता में वे अक्सर अपने वर्तमान के खूबसूरत रिश्तों, बहुमूल्य स्वास्थ्य और जीवन के वास्तविक आनंद की उपेक्षा कर देते हैं। लोग दिन-रात धन कमाने और संपत्ति अर्जित करने में इस कदर खो जाते हैं कि उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए दो पल भी नसीब नहीं होते। धन और संपत्ति जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक साधन हैं, लेकिन साध्य नहीं।
भविष्य को संवारने के चक्कर में यदि आज स्वास्थ्य ही बिगड़ जाए, तो उस संचित धन का कोई मूल्य नहीं रह जाता। अस्पताल के बिस्तरों पर पड़ी दौलत कभी मानसिक शांति और अपनों का सच्चा प्यार नहीं खरीद सकती । रिश्ते और स्वास्थ्य, जीवन की असली पूंजी हैं, जिन्हें एक बार खोने के बाद दोबारा पाना लगभग असंभव होता है।इसलिए, अपनी संपत्ति की रक्षा करना और भविष्य की योजना बनाना निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन इसके लिए वर्तमान को दांव पर लगाना बुद्धिमानी नहीं है। भविष्य की चिंता में अपने वर्तमान का गला ना घोंटें। धन की रक्षा जरूर करें, लेकिन अपने जीवन, स्वास्थ्य और रिश्तों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि एक खुशहाल वर्तमान ही सुंदर भविष्य की सबसे मजबूत नींव रखता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

