

39 वर्ष 7 माह 25 दिनों की सेवा पूर्ण कर हुए सेवानिवृत्त, प्रकृति शक्ति, बूढ़ादेव और पूर्वजों के प्रति जताया आभार
बालाघाट/बिरसा। शासकीय एकीकृत हाई स्कूल गिडोरी, विकासखंड बिरसा में पदस्थ वरिष्ठ शिक्षक जयपाल सिंह धुमकेती के 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त होने पर उनके सम्मान में गरिमामय सेवानिवृत्ति समारोह आयोजित किया गया। समारोह शासकीय शाला प्रांगण गिडोरी तथा उनके मूल निवास ग्राम तिरगांव, तहसील परसवाड़ा में आत्मीय वातावरण में संपन्न हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में 39 वर्ष 7 माह 25 दिनों की अनुशासित, निष्ठावान एवं उत्कृष्ट सेवा पूर्ण करने वाले धुमकेती के सम्मान समारोह में सामाजिक प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षक संगठनों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों, स्वजनों एवं ग्रामीणजनों ने उपस्थित होकर उनके सेवाकाल को याद किया और भावभीनी विदाई दी।


भावुक हुए धुमकेती, प्रकृति शक्ति और पूर्वजों के प्रति जताया आभार
विदाई समारोह को संबोधित करते हुए जयपाल सिंह धुमकेती भावविभोर हो उठे। उन्होंने प्रकृति शक्ति, बूढ़ादेव तथा अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति, समय और मौसम में निरंतर बदलाव आते रहते हैं। प्रकृति शक्ति, बड़ा पेन (बूढ़ादेव) के आशीर्वाद एवं कृपा तथा पूर्वजों के पुण्य-प्रताप से ही उन्हें जीवन में यह अवसर प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि एक समय उनके पूर्वज अच्छे घर और उच्च विचारों वाले व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उन्हीं के पदचिह्नों और संस्कारों का पालन करते हुए उन्होंने अपनी सेवा यात्रा पूर्ण की है। उन्होंने सेवाकाल के दौरान मिले सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं ग्रामवासियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।


पारंपरिक विधि से हुआ अभिनंदन
समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं वंदन के साथ हुआ। इसके पश्चात जयपाल सिंह धुमकेती एवं उनकी धर्मपत्नी दीनू धुमकेती का परिवारजनों एवं सगा-संबंधियों की उपस्थिति में तिलक-वंदन, ढोल-बाजे और पारंपरिक आत्मीयता के साथ अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर शाला में पदस्थ अतिथि शिक्षक शैलेश यादव को भी भावभीनी विदाई दी गई।
जयपाल सिंह धुमकेती : जीवन एवं सेवा यात्रा
जयपाल सिंह धुमकेती का जन्म 12 अगस्त 1964 को ग्राम तिरगांव, पोस्ट मजगांव, तहसील परसवाड़ा, जिला बालाघाट में हुआ। उन्होंने M.A. (समाजशास्त्र), M.Com. (वाणिज्य) तथा ITI बैहर से शिक्षा प्राप्त की।
उनकी शैक्षणिक यात्रा शासकीय प्राथमिक शाला मजगांव (1970-75), शासकीय माध्यमिक शाला बोदा (1975-78), शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसवाड़ा (1978-81) तथा शासकीय अरण्य भारती कॉलेज बैहर (1981-84) से हुई।
06 जनवरी 1987 से 17 जुलाई 1990 तक उन्होंने शासकीय माध्यमिक शाला आरम्भा, विकासखंड खैरलांजी में सेवा दी। इसके बाद 19 जुलाई 1990 से 22 नवंबर 2022 तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मजगांव, विकासखंड परसवाड़ा में पदस्थ रहे। 23 नवंबर 2022 से 31 अगस्त 2026 तक उन्होंने शासकीय हाई स्कूल गिडोरी, विकासखंड बिरसा में सेवाएं दीं, जहां से वे सेवानिवृत्त हुए।
विशिष्टजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में सगा सग्गुम आदिम सामाजिक संगठन, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष तिरुमाल अजीत सिंह तेकाम, तिरमाल महेश धुर्वे, सरस्वती परते, प्रमीला मरावी एवं महदेलाल वट्टी सहित अनेक सामाजिक एवं विशिष्टजन उपस्थित रहे।
BHEL भोपाल एवं विभागीय तथा प्रशासनिक क्षेत्र से तिरुमाल राजकुमार इड़पाची, हेमसिंह बरकड़े, राजेश आर्मो, जगदीश मसराम, बीरबल सिंह धुर्वे, महासिंह धुर्वे, आई.एल. मसकोले, खुशियाल मसराम, डॉ. एस. धुमकेती, डी.एस. धुर्वे, टी.एस. आर्मो, राजीव कुड़ापे, रूपसिंह उइके एवं बोहनसिंह मरावी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वजनों एवं ग्रामीणजनों में रघुप्रसाद धुमकेती, ज्ञानेश्वरी धुमकेती, निलेश्वरी कुर्वेती, जितेंद्र मरकाम, भूपेंद्र कुर्वेती, नैनसिंह धुमकेती, शिवप्रसाद धुर्वे, मधुरा मरकाम, पुतराज धुमकेती, होलूराम धुमकेती, शीलमनी मरकाम एवं आयुषी मरावी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
शाला परिवार एवं स्थानीय समिति ने दी आत्मीय विदाई
शाला परिवार की ओर से प्रभारी प्राचार्य सुनिता मंडल सहित गुलाब गौतम, किशोर कुमार पटले, छत्रपाल नाईक, हुकुमचंद गौतम, एस.एस. मेरावी, भीकम चौधरी, गुलाब मेरावी, लक्ष्मी भगत, ज्योति बिसेन, योगेश्वरी ठाकरे, तुलसी पटले, चरण पालके एवं तेजलाल मरकाम सहित शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा ग्राम पंचायत सरपंच मंगल सिंह धुर्वे, रामनाथ मेरावी, SMC अध्यक्ष मनेश मरकाम, समूह महिला एवं ग्रामीणजनों ने समारोह में सहभागिता कर धुमकेती को शुभकामनाएं दीं।
शिक्षक संघ एवं संकुल परिवार ने किया सम्मान
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ एवं संकुल केंद्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दमोह की ओर से एस.आर. उके ने जयपाल सिंह धुमकेती के सेवाकाल के दौरान उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताते हुए उनके दीर्घ अनुभव एवं ज्ञान का लाभ समाज को देने का आह्वान किया।
परिवारजनों दीनू धुमकेती एवं पालेंद्र धुमकेती की ओर से जयपाल सिंह धुमकेती को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सदैव प्रेरणा देती रहेगी
समारोह में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि जयपाल सिंह धुमकेती का शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक विकास में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनका अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, सरल-सहज व्यवहार एवं विद्यार्थियों के प्रति समर्पण नई पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
समारोह का वातावरण आत्मीयता, सम्मान और भावुकता से सराबोर रहा। उपस्थित जनों ने जयपाल सिंह धुमकेती के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं सुखद सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना की तथा उनके अनुभवों एवं सामाजिक योगदान की निरंतरता की अपेक्षा व्यक्त की।
प्रेषक—एस. आर. उके

