
तकनीकी सहायक अटैच, सरपंच के विरुद्ध प्रकरण एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत; मनरेगा कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की चेतावनी
सक्ती, 19 अगस्त 2026। ग्राम पंचायत कचंदा में मनरेगा योजना के तहत अप्रैल माह में निर्मित नाली के क्षतिग्रस्त होने के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और घटिया गुणवत्ता सामने आने के बाद पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं तकनीकी सहायक को अटैच करते हुए उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरपंच के विरुद्ध पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वासु जैन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 अगस्त को ग्राम पंचायत कचंदा में निर्मित नाली के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्रशासन को मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन जांच के आदेश जारी किए गए। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की पाई गई। निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही और निर्धारित गुणवत्ता मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की गई।
सचिव निलंबित, तकनीकी सहायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
निर्माण कार्य में घोर लापरवाही और घटिया गुणवत्ता के लिए ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं तकनीकी सहायक द्वारा अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किए जाने पर उसे अटैच कर दिया गया है तथा उसके विरुद्ध आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सरपंच के विरुद्ध प्रकरण एसडीओ राजस्व के समक्ष
मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई शुरू की गई है। पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है।
गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं : वासु जैन
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वासु जैन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मनरेगा सहित सभी विकास एवं निर्माण परियोजनाओं में कार्य की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, घटिया सामग्री का उपयोग अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कचंदा की घटना में की गई कार्रवाई को प्रशासन की ओर से विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पंचायत स्तर पर संचालित मनरेगा और अन्य निर्माण कार्यों में जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होने का संदेश गया है।

