
कीचड़ में फंस रहा गांव का भविष्य, स्कूली बच्चे रोज जोखिम उठाकर पहुंच रहे स्कूल; ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी स्थायी समाधान नहीं
मूकनायक समाचार | संवाददाता सत्यशील गोंडाने
वारासिवनी (झाड़गांव-मेडकी), बालाघाट।बालाघाट जिले के वारासिवनी क्षेत्र के झाड़गांव और मेडकी ग्राम पंचायत अंतर्गत सहजा टोला की बदहाल सड़क ने ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब 20 वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। बारिश के दिनों में सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है तथा पूरा मार्ग कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है।

कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल पहुंच रहे बच्चे
सहजा टोला के स्कूली बच्चे इसी बदहाल रास्ते से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान सड़क पर जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा होने से बच्चों को फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बच्चे रास्ते में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, जबकि उनके कपड़े और किताबें खराब होना आम बात हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य सुविधाओं पर जोर दिया जाता है, लेकिन स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्या वर्षों से बनी हुई है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और नियमित शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षक भी होते हैं परेशान
सड़क की बदहाली का असर शिक्षकों और अन्य ग्रामीणों पर भी पड़ रहा है। बारिश और कीचड़ के कारण आवागमन कठिन होने से कई बार शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब विद्यार्थी और शिक्षक ही समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाएंगे तो ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी।
कई ग्रामीणों के घायल होने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार कीचड़ में दोपहिया वाहन फिसलने और पैदल लोगों के गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। कई ग्रामीणों के घायल होकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति को देखते हुए कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
20 वर्षों से सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग करीब दो दशक पुरानी है। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार समस्या रखी। हर बार सड़क निर्माण का आश्वासन मिला, लेकिन बारिश आते ही समस्या फिर उसी स्थिति में लौट आती है। ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि यदि 20 वर्षों में सड़क निर्माण नहीं हो सका तो विकास से जुड़ी योजनाओं और प्रस्तावों की स्थिति क्या रही।
दो पंचायतों के बीच सड़क निर्माण को लेकर सवाल
सहजा टोला की सड़क झाड़गांव और मेडकी ग्राम पंचायत से जुड़ी होने के कारण ग्रामीणों ने दोनों पंचायतों से समन्वय कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है तो जनपद पंचायत, जिला पंचायत और संबंधित विभाग के माध्यम से सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजकर आवश्यक राशि की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सरपंचों ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
ग्रामीणों से चर्चा के दौरान सरपंचों ने समस्या के समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल्द उचित व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क से जुड़ी समस्या का शीघ्र निराकरण कराने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।

अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से आश्वासन सुनते आ रहे हैं, लेकिन अब उन्हें स्थायी समाधान चाहिए। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने, बारिश के दौरान आवागमन योग्य व्यवस्था करने तथा स्थायी सड़क निर्माण के लिए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है।
सहजा टोला की सड़क की बदहाली ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के दावों का वास्तविक लाभ जमीन पर कब पहुंचेगा। करीब 20 वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के रूप में ठोस कार्रवाई का इंतजार है।

