Tuesday, September 29, 2026
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प्रदेश में 1460 गौधाम स्थापित करेगी सरकार, निराश्रित मवेशियों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप गौठानों को मिलेगी प्राथमिकता, ग्राम पंचायतों को संचालन में दी जाएगी वरीयता

रायपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में घुमंतू एवं निराश्रित मवेशियों के संरक्षण, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से गौधाम योजना का विस्तार कर रही है। योजना के तहत पूरे प्रदेश में 1,460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा गौधाम योजना के अंतर्गत 1,460 गौधामों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट 10 गौठानों का चयन कर उन्हें गौधाम के रूप में विकसित किया जाएगा। अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 88 गौधामों का पंजीयन पूरा किया जा चुका है। वर्तमान में संचालित 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित गौठानों को प्राथमिकता

संयुक्त संचालक (पशु चिकित्सा सेवाएं) के अनुसार योजना के प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित हैं तथा जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध है। इन गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और ट्रस्टों के माध्यम से किया जाएगा।

हाल ही में पशुधन विकास विभाग द्वारा नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को गौधाम संचालन में प्राथमिकता प्रदान की गई है। इसके साथ ही शहरी गौठानों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे योजना का लाभ अधिक व्यापक स्तर पर मिल सके।

पारदर्शी प्रक्रिया से होगा गौधामों का चयन

गौधाम स्थापना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। जिला स्तरीय समिति एवं कलेक्टर की अनुशंसा के बाद संबंधित ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाता है। इसके पश्चात भौतिक सत्यापन कर आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं। आयोग की क्रियान्वयन समिति प्रत्येक तीन माह में आयोजित बैठक में आवेदनों की विस्तृत समीक्षा करती है। समिति की अनुशंसा के बाद अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति शासन द्वारा जारी की जाती है, जिसके बाद अनुबंध और पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

राज्य सरकार का मानना है कि गोधन ग्रामीण संस्कृति और कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ग्राम पंचायतों को संचालन की जिम्मेदारी देने तथा शहरी गौठानों को योजना में शामिल करने से भविष्य में गौधामों की संख्या में और वृद्धि होगी। वर्तमान में विभिन्न जिलों से नए गौधामों की स्थापना के लिए लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है।

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