Tuesday, September 29, 2026
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निराश्रित गौवंश संरक्षण के लिए गौधाम योजना का बढ़ रहा दायरा

ग्राम पंचायतों को मिली प्राथमिकता, अब तक 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति, 42 गौधामों में 5,109 गौवंश संरक्षित

रायपुर, 3 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के माध्यम से प्रदेश में घुमन्तू एवं निराश्रित गौवंश के संरक्षण और सुव्यवस्थित व्यवस्थापन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के विस्तार को गति देने के लिए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने के साथ शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गौधामों का तेजी से विकास हो सके।

राज्य शासन ने 6 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को गौधाम योजना की स्वीकृति प्रदान की थी। योजना के तहत ऐसी शासकीय भूमि एवं गौठानों का चयन किया जाता है, जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध हो और जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हों। गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ, ट्रस्ट तथा संशोधित नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जा रहा है।

गौधाम की स्थापना के लिए कलेक्टर एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा भौतिक सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं, जहां समीक्षा के उपरांत प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जाती है। अनुबंध और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से गौधामों में निराश्रित पशुओं का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जाता है।

पशुधन विकास विभाग ने 30 जुलाई 2026 को नियमों में संशोधन कर गौधाम संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश में गौवंश संरक्षण के लिए व्यापक आधार तैयार होगा।

योजना के अंतर्गत अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण हो गया है, जबकि 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित गौवंश का संरक्षण एवं व्यवस्थापन किया जा रहा है। शेष स्वीकृत गौधामों में पंजीयन और संचालन की प्रक्रिया जारी है।

राज्य गौ सेवा आयोग के अनुसार गौधामों की कोई निर्धारित लक्ष्य संख्या तय नहीं की गई है। हालांकि प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर चरणबद्ध तरीके से लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार का उद्देश्य निराश्रित एवं घुमन्तू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। जिलों से लगातार प्राप्त हो रहे आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और संशोधित प्रावधानों के बाद प्रदेश में गौधामों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

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