मूकनायक/डॉ. जी. पी. मानव, जिला संवाददाता उन्नाव/उत्तर प्रदेश
मानव विकास संस्थान के जागरूकता अभियान के तहत कैडर मीटिंग 02अगस्त 2026 रविवार को विनोद मौर्या के आवास पर,ग्राम- तिवारिनखेड़ा मजरा भौली, ब्लॉक-नवाबगंज, तहसील-हसनगंज, जनपद- उन्नाव (उ.प्र.) में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानव विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश के प्रमुख डॉ. जी. पी. मानव, सेवा निवृत्त उप प्राचार्य (केन्द्रीय विद्यालय संगठन, भारत सरकार, नई-दिल्ली) थे।
विशिष्ट अतिथि-संगठन के संरक्षक राकेश विद्यार्थी थे।
सर्वप्रथम बौद्धाचार्य ए.एल. बौद्ध ने तथागत भगवान गौतम बुद्ध, बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सहित अन्य महापुरुषों के छाया चित्रों के समक्ष मुख्य अतिथि सहित गणमान्य लोगों से दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्पण कराया तत्पश्चात् उपस्थित जनसमूह को बुद्ध वंदना (त्रिशरण और पंचशील) का पाठ ग्रहण कराया।
कैडर मीटिंग में मानव विकास संस्थान, उन्नाव के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार धानुक ने संगठन के बारे में बताते हुए कहा कि मानव विकास संस्थान एक गैर राजनैतिक संगठन है, अर्थात् यह शुद्ध रूप से सामाजिक संगठन है, जो समाज में फैली हुई अनेकों जातियां हैं और उनमें जो ऊंच-नीच,भेद-भाव, छुआछूत फैली है। उसको खत्म करके भाईचारा पैदा करना और सामाजिक तथा सांस्कृतिक एकता को मजबूत करके भारत देश को विश्व में अग्रणी बनाना है। यह संगठन बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं तथागत भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं/ विचारों के आधार पर काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, रोजगार को बढ़ावा देना। समाज में फैले हुए अंधविश्वास- पाखंड और कुरीतियों को दूर करना एवं महापुरुषों के जीवन संघर्ष, उनकी शिक्षाओं का प्रचार करना है।
राकेश विद्यार्थी ने मानव की उत्पत्ति, उसका विकास एवं भारत देश में जातिवाद और उससे ग्रसित बहुजन समाज के बारे में विस्तार से समझाया।
वैसे तो प्राकृतिक रूप से देखें तो मानव जाति संपूर्ण संसार में एक ही नजर आती है। जन्म- मृत्यु, आहार- विहार, दु:ख- सुख मूल तत्व सभी समान नजर आते हैं। इससे सत्य साबित होता है कि मनुष्यों में जाति पाति नहीं होती है। मनुष्य की उत्पत्ति से लेकर अब तक मनुष्यों में कई बदलाव देखने को मिले हैं।
मानव की उत्पत्ति लगभग 60 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका में प्राइमेट्स से मानी जाती है और तीन लाख वर्ष पूर्व आधुनिक मानव होमो सेपियंस का उदय हुआ। बाद में वह पूरी दुनिया में फैल गए। लगभग 12000 वर्ष पूर्व कृषि का ज्ञान हुआ। तब सभ्यताओं का निर्माण शुरू हुआ।मानव उत्पत्ति और विकास के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं– पहले प्राईमेट्स और होमिनिड्स अलग-अलग हुए। उसके बाद होमो इरेक्टस यह पहले मानव थे,जो सीधे खड़े होकर चल सकते थे। उन्होंने आग का उपयोग करना सीखा और पत्थर के औजार बनाना सीखा।
होमो सेपियन्स का मस्तिष्क बड़ा, चेहरा छोटा और सोचने समझने की क्षमता अधिक थी। 12000 वर्ष पूर्व मानव ने शिकार छोड़कर कृषि और पशुपालन शुरू किया। जिससे स्थाई बस्तियां और पहले मानव सभ्यताएं जैसे- मेसोपोटामिया, मिश्र, सिंधु घाटी बनी। जब इन सभ्यताओं का पतन शुरू हुआ। तब मानव इतिहास में कांस्य युग से लौह युग में संक्रमण हुआ। जिसके उपरांत दुनिया में नए और बड़े साम्राज्यों, धर्मों और शासन प्रणालियों का उदय हुआ। भारत में वैदिक धर्म, सनातन परंपरा, जैन धर्म और बौद्ध धर्म जैसे दर्शनों का उदय हुआ।
शुरुआत में वर्ण व्यवस्था कर्म और गुण पर आधारित थी। (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र) लेकिन बाद में यह व्यवस्था लचीली और कठोर हो गई लोगों का पेशा/ कार्य उनके जन्म से ही तय होने लगा। कुछ चंट- चालक लोगों ने कई ग्रंथ लिखे, जिन्हें धर्मशास्त्र कहा गया और उन धर्म ग्रंथो में खास तौर से मनुस्मृति की जो रचना हुई, उसमें हर वर्ण/ जाति के लिए कर्तव्य और सामाजिक नियमों का कठोरता से पालन कराया गया। जिससे कि ऊंच- नीच की भावना को बढ़ावा मिला। वर्णों के आधार पर भूमि, शिक्षा और हथियारों पर नियंत्रण तय हो गया। जो ऊंचे वर्ण के थे। उन्होंने अपने विशेषाधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए इसे दैवीय रूप दे दिया। कालांतर में हजारों समुदायों और उपजातियों का निर्माण हुआ। जिससे खान-पान, शादी- विवाह और सामाजिक संबंधों तक सीमित हो गया। मनुस्मृति का सबसे घातक काला कानून जो लिखा गया स्त्रीशूद्रो नाधीयताम् पढ़ने लिखने का अधिकार न मिलने के कारण देश के लगभग 97% लोग अशिक्षित हो गये। मुट्ठी भर पढ़े-लिखे चंट- चालक लोगों ने देश को मनमाने ढंग से चलाया, देश को बर्बाद कर दिया और अभी तक कर रहे हैं। देश सैकड़ों वर्ष विदेशियों का गुलाम रहा।
अंग्रेजों ने शिक्षा पर ध्यान दिया, तो कुछ लोगों को पढ़ने लिखने का अधिकार मिला। बाद में बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने जब संविधान लिखा, तब जाकर पूर्ण रूप से सभी को पढ़ने लिखने का अधिकार तो मिल गया लेकिन आज भी देश में शिक्षा का अभाव होने के कारण लोग जाति को छोड़ नहीं पा रहे हैं। अन्धविश्वास और पाखंड में उलझ कर एक दूसरे से अपने को ऊंचा साबित करने पर लगे हैं। जबकि बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर का संविधान पूर्ण रूप से पालन किया जाए तो देश में समता, स्वतंत्रता, बंधुता, न्याय, ज्ञान और विज्ञान की पूर्ण से स्थापना हो सकती है।
बौद्धाचार्य ने तथागत भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। त्रिशरण, पंचशील, चार आर्य सत्य, आष्टांगिक मार्ग और 10 पारमिताओं का मतलब सरल भाषा शैली में सभी को समझाया।
मानव विकास संस्थान जिला कार्यकारिणी सदस्य माया बौद्ध ने बहुत सुन्दर एवं सराहनीय गीत की प्रस्तुति दी।
मुख्य अतिथि डॉ. जी. पी. मानव ने मुख्यतः समाज, संगठन, संविधान और संस्कारों पर चर्चा किया। समाज का मतलब समझाया कि समाज एक दूसरे के प्रति स्नेह और सहयोग की भावना के साथ मिलकर रहने वाले लोगों का एक संगठित समुदाय है, किन्तु भारत में संविधान लागू होने के पूर्व एक समाज नहीं था। बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के द्वारा सम्पूर्ण भारत के लोगों को भारतीय (Indian) बनाया। किसी भी जाति,धर्म और सम्प्रदाय की बात करने वाले लोग भारतीय हैं और अंत तक भारतीय रहेंगे। संस्कृति और सभ्यता को भी समझाया।
भारत में कई लाख संगठन बने हुए हैं जिनमें प्रमुख रूप से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक हैं। उन्हीं में से मानव विकास संस्थान एक सामाजिक संगठन है। वैसे तो कई लोग जातीय संगठन चलाते हैं, जो कि भारतीय समाज को खंडित कर रहे हैं और असंवैधानिक है। मानव विकास संस्थान पूर्ण से मानव समाज की एकता की बात करता है।
भारतीय संविधान कैसे बना? किसने बनाया? कब बना? कब लागू हुआ?
नागरिकों के कर्तव्य और अधिकार कौन कौन से हैं?
जहां तक संस्कारों की बात है, इस विषय पर विशेष चर्चा किया। आगे समझाया कि अंधविश्वास पाखंड और सामाजिक कुरीतियों को को दूर कीजिए। तभी भारतीय समाज एवं देश विकसित होगा। तथागत भगवान गौतम बुद्ध की बात को याद दिलाते हुए कहा कि पहले जानो,तब मानो।
सभाध्यक्ष नूरहसन ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर एवं बुद्ध की विचारधारा को घर घर पहुंचाने की अपील करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की।
इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक विनोद मौर्य के सहयोगी रामदीन, गंगाराम, बाबूलाल,मैकूदास, सुनील और राजेश मौर्य रहे।

