मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आस्था जीवन की वह दिव्य शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर के अंधकार और भय को मिटाकर प्रकाश और सकारात्मकता भर देती है। यह केवल एक अंधविश्वास या कोरी कल्पना नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से लड़ने की आंतरिक ऊर्जा है। आस्था का अर्थ और महत्व आस्था का सीधा अर्थ विश्वास है। जब मनुष्य सांसारिक दुखों, असफलताओं या अनिश्चितताओं से घिरा होता है, तब आस्था ही उसे लक्ष्य से भटकने नहीं देती। यह मनुष्य को निराशा के गर्त से निकालकर आशा की ओर ले जाती है। जीवन में भय, अज्ञानता और नकारात्मकता का अंधकार तब छाता है, जब मनुष्य का स्वयं से या किसी सर्वोच्च शक्ति से विश्वास डगमगाने लगता है।
आस्था उस दीपक के समान है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बुझता नहीं है। यह मन में छिपी चिंताओं और असफल होने के डर को समाप्त कर साहस का संचार करती है। कर्म और प्रेरणा का आधार सच्ची आस्था कभी भी मनुष्य को निष्क्रिय नहीं बनाती, बल्कि उसे अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। जब किसी कार्य में आस्था जुड़ जाती है, तो वह कार्य बोझ ना रहकर साधना बन जाता है। आस्था जीवन का वह संबल है जो कठिन परिस्थितियों में मनुष्य को टूटने नहीं देता। यह अंतर्मन में शांति, धैर्य और एक नई सुबह की उम्मीद जगाती है। आस्था के प्रकाश में ही मानव जीवन सार्थक और आनंदित होता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

