रिपोर्ट- राजेश कुमार बौद्ध, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
लखनऊ में भारतीय समन्वय संगठन (लक्ष्य) के सैकड़ो कमांडरों ने मणिपुर में आदिवासियों पर हो रही अमानवीय घटनाओं को लेकर एक आक्रोश प्रदर्शन रैली का आयोजन लखनऊ के आशियाना में किया जो लक्ष्य के जिला कार्यालय से चलकर आशियाना पुलिस चौकी से बांग्ला बाजार होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर समाप्त हुई जिसका नेतृत्व लक्ष्य की महिला कमांडरों ने किया।
लक्ष्य कमांडरों ने जलती हुई मोमबत्तियों के साथ मणिपुर के शासन प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारे लगाकर अपना रोष व्यक्त किया।लक्ष्य कमांडरों ने कहा कि मणिपुर में आदिवासियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है उनकी सरेआम हत्याएं की जा रही हैं उनकी बहन बेटियों को नग्न करके सरेआम घुमाया जा रहा है,उनकी इज्जत लूटी जा रही है,यह कत्लेआम का तांडव पिछले लगभग 80 दिनों से चल रहा है। इस घटना ने मानवता को तार तार कर दिया है ऐसा लग ही नहीं रहा है कि देश में संविधान नाम की कोई चीज़ है भी,दबंगो को किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं दिखाई दे रहा है और सरकारों की चुप्पी और भी दुखदाई है। ऐसा लगता है कि जैसे यह सब कुछ सुनियोंजित हो।
इस अमानवीय घटना ने देश की महिलाओं व बहुजन समाज के लोगों में भय उत्पन्न कर दिया है वे अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तथा उनमे रोष व्याप्त है। लक्ष्य कमांडरों ने कहा कि यह देश के इतिहास में एक काला अध्याय है जिसने देश की एकता अखंडता को कलंकित किया है और विश्व स्तर पर भारत देश के नाम को बदनाम किया है, इसके दूरगामी दुष्परिणाम होंगे।
लक्ष्य कमांडरों ने प्रदेश और विशेष तौर से केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या मणिपुर की यह अमानवीय घटना शासन- प्रशासन की विफलता है या नीयत में खोट है। उन्होंने कहा कि हमारे नेताओं को वोट का खेल बंद करना चाहिए और देश के सभी नागरिकों की जानमाल की हिफाज़त ईमानदारी से करनी चाहिए अर्थात् संविधान को ईमानदारी से लागू करना चाहिए तथा जाति व धर्म से ऊपर उठकर सभी नागरिकों को एक समान दृष्टि से देखना चाहिए सभी को विकास के समान अवसर मिलने चाहिए।
लक्ष्य कमांडरों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार अपनी मानसिकता बदले और तुरंत दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे और पीड़ितों को उचित मुआवजा दें और उनकी जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

