मूकनायक /राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर देखा जाता है कि लोग अच्छी बातें जानते हैं, उनका अभ्यास भी करते हैं और दूसरों को प्रेरित भी करते हैं, लेकिन जब खुद उन बातों पर अमल करने की बारी आती है, तो कदम डगमगाने लगते हैं। सलाह केवल वैचारिक स्तर पर होती है, जबकि व्यवहारिक धरातल स्तर पर भावनाएं, परिस्थितियां और व्यक्तिगत चुनौतियां आड़े आती हैं। इंसान की पुरानी आदतें और उसका अहंकार अक्सर उसे सलाह को स्वीकार करके अपने व्यवहार को बदलने से रोकता है। किसी सलाह का असर दिखने में समय लगता है। आज की त्वरित परिणाम चाहने वाली संस्कृति में लोग अभ्यास बीच में ही छोड़ देते हैं।
इसलिए किसी भी अच्छी सलाह को एक साथ पूरे जीवन में लागू करने के बजाय छोटे-छोटे बदलावों से शुरू करें। दिन के अंत में खुद से पूछें कि आज मिली या सीखी गई अच्छी बात को आपने कहाँ अपनाया। केवल अच्छी बात सुन लेना काफी नहीं है, उसे अपनाने के लिए इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है । सलाह केवल एक नक्शा है, लेकिन मंजिल तक पहुँचने के लिए चलना खुद को ही पड़ता है। बिना अमल के दुनिया की बेहतरीन से बेहतरीन सलाह भी केवल शब्दों का जाल बनकर रह जाती है। इसलिए, जीवन में ज्ञान की नहीं, बल्कि उस ज्ञान पर चलने के ‘साहस और आचरण’ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

