
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चियों की रायपुर में निःशुल्क सफल सर्जरी, 6,224 बच्चों की स्वास्थ्य जांच के बाद मिली बड़ी सफलता
रायपुर, 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने एक बार फिर मानवता और संवेदनशील प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। दूरस्थ और आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले की तीन मासूम बच्चियों को जन्मजात हृदय रोग से मुक्त कर नया जीवन मिला है। जिला प्रशासन नारायणपुर और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के संयुक्त प्रयासों से इन बच्चियों की समय पर पहचान कर रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल में उनका पूरी तरह निःशुल्क सफल हृदय ऑपरेशन कराया गया।

दूरस्थ क्षेत्रों में जन्मजात हृदय रोग की समय पर पहचान न हो पाने के कारण कई बच्चों का उपचार समय पर नहीं हो पाता। इसी चुनौती को देखते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने 23 फरवरी 2026 को ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य जिले के दूर-दराज के गांवों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान करना और उन्हें समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।
आरबीएसके की टीमों ने अभियान के तहत जिलेभर में व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया। अब तक 6,224 बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इसी दौरान तीन बच्चियों में जन्मजात हृदय रोग की गंभीर समस्या का पता चला, जिसके बाद तत्काल चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की गई।

जांच के दौरान डेढ़ वर्षीय पारुल दुग्गा, तीन वर्षीय नायशा और पांच वर्षीय अनुष्का मंडावी की गंभीर स्थिति सामने आई। आरबीएसके टीम ने प्राथमिक परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श के बाद तीनों बच्चियों को रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल रेफर किया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी सफल और पूरी तरह निःशुल्क हृदय सर्जरी की। उपचार के बाद तीनों बच्चियां अब स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं।
बच्चियों के सफल उपचार से उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। जिन माता-पिता की आंखों में पहले चिंता और बेबसी थी, आज उनमें अपने बच्चों के स्वस्थ भविष्य की उम्मीद और संतोष दिखाई दे रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का अभियान लगातार जारी है। बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जा रही है ताकि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित किसी भी बच्चे की समय पर पहचान कर उसे बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग, त्वरित रेफरल और विशेषज्ञ उपचार के समन्वय से बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में खेलते समय सांस फूलना, जल्दी थक जाना, उम्र के अनुसार वजन न बढ़ना, बार-बार बीमार पड़ना या लगातार सर्दी-खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें और तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। समय पर पहचान और उपचार से जन्मजात हृदय रोग का सफल इलाज संभव है।

