Tuesday, September 29, 2026
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एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास, 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया ऐतिहासिक समझौता

वैश्विक नवाचार, अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग को मिलेगा नया आयाम, बैंकॉक में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मिली बड़ी उपलब्धि

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक जगत में राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान विश्वविद्यालय ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस उपलब्धि को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

यह बहुपक्षीय समझौता दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के 20 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के बीच संपन्न हुआ। समझौते का उद्देश्य उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, सतत विकास तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देना है। इससे सहभागी संस्थानों के बीच ज्ञान, संसाधनों और अनुभवों का आदान-प्रदान और अधिक मजबूत होगा।

यह ऐतिहासिक समझौता 9 एवं 10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘एयूएपी-डब्ल्यूयूआरआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान हुआ। दो दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार, नीति, तंत्र और प्रभाव रहा। सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, नवाचार विशेषज्ञ तथा शोधकर्ता शामिल हुए और उच्च शिक्षा के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अभिनव ‘रिसर्च हब एंड स्पोक (R-HaS)’ मॉडल पर आधारित केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार एचएनएलयू अंतर्विषयी अनुसंधान, बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाओं तथा समाजोपयोगी अनुसंधान के माध्यम से विधि शिक्षा में नए मानक स्थापित कर रहा है। उनकी प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा और इसे नवाचार आधारित अनुसंधान का प्रभावी मॉडल बताया।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को विश्व स्तर पर स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बहुपक्षीय समझौता विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन के दौरान एयूएपी के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय विकास तथा छात्र विनिमय कार्यक्रमों को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई।

समझौते के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी विश्वविद्यालय भविष्य में संयुक्त रूप से वैश्विक महत्व की अनुसंधान एवं नवाचार परियोजनाओं पर कार्य करेंगे। इसके अलावा संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय विनिमय कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने, स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाओं और केस स्टडी विकास जैसे क्षेत्रों में भी साझा पहल की जाएगी।

शिखर सम्मेलन का आयोजन एयूएपी (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक) तथा डब्ल्यूयूआरआई (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) के सहयोग से किया गया। एयूएपी एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख विश्वविद्यालय संगठन है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देता है। वहीं डब्ल्यूयूआरआई विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन पारंपरिक शैक्षणिक मानकों के बजाय सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता, नवाचार और नैतिक नेतृत्व जैसे आधुनिक मानकों के आधार पर करता है।

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में शामिल है। अपने विशिष्ट ‘R-HaS’ मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति तथा लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के माध्यम से विश्वविद्यालय राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। बैंकॉक में हुई यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और इससे विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान तथा नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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