Thursday, July 16, 2026
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पीजीआई 2.0 में रायगढ़ ने रचा इतिहास, पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान

600 में 329 अंक हासिल कर ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में बनाया स्थान, डिजिटल शिक्षा और प्रभावी शैक्षणिक प्रबंधन बना सफलता का आधार

विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के मूल्यांकन में रायगढ़ जिले ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई 2.0) में पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी मूल्यांकन में रायगढ़ को 600 में 329 अंक प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर जिले को ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में स्थान मिला है। इस उपलब्धि ने शिक्षा के क्षेत्र में रायगढ़ को प्रदेश का अग्रणी जिला बना दिया है।

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई 2.0) शिक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित एक वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रणाली है, जिसके माध्यम से राज्यों एवं जिलों की शिक्षा व्यवस्था का आकलन विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम, प्रभावी कक्षा संचालन, डिजिटल शिक्षा, विद्यालयी अधोसंरचना, शिक्षक उपलब्धता, समावेशी शिक्षा, शैक्षणिक प्रबंधन तथा अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना है।

रायगढ़ की यह सफलता पिछले दो वर्षों में शिक्षा सुधार के लिए किए गए सुनियोजित प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू और जिला मिशन समन्वयक आलोक स्वर्णकार के नेतृत्व में शिक्षा विभाग ने योजनाबद्ध रणनीति, नियमित समीक्षा, सतत मॉनिटरिंग और नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

पीजीआई 2.0 के तहत जिले का मूल्यांकन कुल 600 अंकों पर किया गया, जिसमें परख/राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के 180 अंक, प्रबंध पोर्टल के 10 अंक तथा यू-डाइस प्लस पोर्टल के 410 अंक निर्धारित थे। रायगढ़ ने सीखने के परिणाम, प्रभावी कक्षा संचालन, शैक्षणिक प्रबंधन और विद्यालयी प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।

जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान डिजिटल शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई। स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, ई-कंटेंट, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री तथा ‘दीक्षा’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया गया। शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया गया, जिससे विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

इस उपलब्धि में यू-डाइस प्लस पोर्टल पर समयबद्ध एवं त्रुटिरहित डेटा प्रविष्टि की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों में डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा, सत्यापन और तकनीकी मार्गदर्शन की व्यवस्था की। इसके साथ ही विद्यालयों का नियमित निरीक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण, आधारभूत सुविधाओं का विकास, समावेशी शिक्षा और नवाचार आधारित गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा दिया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू ने इस सफलता का श्रेय जिले के सभी प्राचार्यों, शिक्षकों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों, पालकों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास, अनुशासन एवं समर्पण को दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के उद्देश्य से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभी शैक्षणिक पोर्टलों पर समयबद्ध एवं त्रुटिरहित डेटा प्रविष्टि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जिला मिशन समन्वयक आलोक स्वर्णकार ने पूरी शिक्षा टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और भविष्य में इससे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा। वहीं शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विद्यालयों के नियमित मार्गदर्शन, गुणवत्ता सुधार एवं नवाचार आधारित गतिविधियों के सफल संचालन में एपीसी भूपेंद्र पटेल के योगदान को भी महत्वपूर्ण माना गया।

रायगढ़ की यह उपलब्धि स्पष्ट करती है कि सुदृढ़ नेतृत्व, स्पष्ट कार्ययोजना, तकनीक आधारित शिक्षण, प्रभावी डेटा प्रबंधन और टीमवर्क के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। जिले की यह सफलता प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।

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