
छत्तीसगढ़। विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई के निधन के समाचार पर विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में शोक की लहर है। इसी क्रम में बीआरसी एच.के. बेहार तथा प्रधान पाठक डॉ. उमेश कुमार दुबे ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शोक संदेश में उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं पंडवानी गायन परंपरा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। अपनी अद्वितीय प्रस्तुति, प्रभावशाली गायन शैली और विलक्षण प्रतिभा के माध्यम से उन्होंने भारतीय लोक संस्कृति को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया। उनका संपूर्ण जीवन लोक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा।
एच.के. बेहार ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी कला से अनगिनत कलाकारों को प्रेरित किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत छोड़ी है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

प्रधान पाठक डॉ. उमेश कुमार दुबे ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
डॉ. तीजन बाई के निधन पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे लोक कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया तथा उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।

