Monday, July 27, 2026
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महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के समर्थन में 26 जून को देशव्यापी एक दिवसीय भूख हड़ताल

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के समर्थन में 26 जून को देशव्यापी एक दिवसीय भूख हड़ताल

बिलासपुर, छत्तीसगढ़।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति के आह्वान पर 26 जून 2026 को बोधगया सहित देशभर में एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की जाएगी। आंदोलन का उद्देश्य महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को बौद्ध समाज के नियंत्रण में सौंपने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।
पंचशील बुद्ध विहार, टिकरापारा बिलासपुर से इस अभियान में शामिल होने के लिए अनामिका पाटील एवं चेतना तम्हाने बोधगया रवाना हो रही हैं, जबकि मुकेश गोंडाने अन्य मार्ग से आंदोलन में सहभागिता हेतु प्रस्थान कर रहे हैं।
राष्ट्रीय समिति के अनुसार महाबोधि महाविहार विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। समिति का कहना है कि महाविहार के प्रबंधन में बौद्ध समाज की निर्णायक एवं प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आंदोलनकारियों का मत है कि वर्तमान में लागू 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम की समीक्षा अथवा निरस्तीकरण आवश्यक है। उनका कहना है कि महाविहार के संचालन एवं प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बौद्ध प्रतिनिधियों की एक स्वतंत्र समिति गठित कर उसे पूर्ण अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि बौद्ध समाज के अधिकारों, प्रतिनिधित्व और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। आंदोलन भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों, सम्राट अशोक की धम्म परंपरा तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों के विचारों से प्रेरित है।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति ने देशभर के बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक संगठनों तथा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले नागरिकों से 26 जून को आयोजित एक दिवसीय भूख हड़ताल में भाग लेकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है। समिति ने कहा है कि यह अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से संचालित किया जाएगा।

///मुख्य मांगें: •///

. महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाए।

  • बौद्ध प्रतिनिधियों की स्वतंत्र समिति गठित कर प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं।
  • 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम को निरस्त अथवा पुनर्विचारित किया जाए।
  • महाविहार के प्रबंधन में बौद्ध समुदाय की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
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