Thursday, June 11, 2026
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एफसीआई का 242 क्विंटल सीएमआर चावल राइस मिल परिसर में मिला, जांच शुरू

इथेनॉल प्लांट भेजा जाना था चावल, वारासिवनी में मिलने पर उठे सवाल; प्रशासन कर रहा जांच

मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

वारासिवनी। जिले में सरकारी खाद्यान्न के परिवहन और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक मामला सामने आया है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का 242 क्विंटल 55 किलोग्राम कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) चावल वारासिवनी क्षेत्र स्थित एक राइस मिल परिसर में पाए जाने के बाद खाद्य एवं राजस्व विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार 3 जून 2026 को खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा वारासिवनी क्षेत्र में जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान एक ट्रक में एफसीआई डिपो नवेगांव-कोसमी का सीएमआर चावल पाया गया। अधिकारियों द्वारा परिवहन संबंधी दस्तावेजों की मांग किए जाने पर मौके पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रक एवं चावल को जब्त कर वारासिवनी थाना की अभिरक्षा में रखवा दिया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उक्त चावल एफसीआई डिपो नवेगांव-कोसमी से छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित इथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया था। ऐसे में निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय वाहन का वारासिवनी स्थित राइस मिल परिसर में पाया जाना जांच का विषय बना हुआ है।

अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वाहन निर्धारित मार्ग से हटकर उक्त स्थान तक कैसे पहुंचा तथा इस प्रक्रिया में किन-किन व्यक्तियों की भूमिका रही। फिलहाल किसी भी प्रकार की अनियमितता या दुरुपयोग के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। वहीं सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि जांच केवल वाहन चालक तक सीमित न रहकर पूरी परिवहन प्रक्रिया और संबंधित जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की भी पड़ताल की जाए।

खाद्य एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले का प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बालाघाट जिले में धान और चावल का बड़ा कारोबार होने के कारण यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वाहन निर्धारित गंतव्य तक क्यों नहीं पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

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