
बूढ़ी की महिलाओं ने संभाला मोर्चा, शराब भट्टी बंद कराने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने (बालाघाट)
बालाघाट। बूढ़ी क्षेत्र में संचालित शराब भट्टी को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं, ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में आंदोलनकारी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शराब भट्टी को तत्काल बंद करने की मांग की।
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शनकारियों ने “शराब भट्टी हटाओ, शहर बचाओ” तथा “नशामुक्त समाज बनाओ” जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का कहना है कि शराब भट्टी के संचालन से क्षेत्र का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर परिवारों एवं युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
परिवार बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं महिलाएं
आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने कहा कि शराब की वजह से कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे हैं। मेहनत-मजदूरी से अर्जित आय का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो जाने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू आवश्यकताएं प्रभावित हो रही हैं।
महिलाओं ने बताया कि वे कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंप चुकी हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ रही है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की कि बूढ़ी क्षेत्र में संचालित शराब भट्टी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए तथा क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। ज्ञापन में चेतावनी भी दी गई कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि शराब सेवन के कारण अपराध, सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक विवादों में बढ़ोतरी हो रही है। शासन को केवल राजस्व नहीं, बल्कि समाज के हित और भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र की महिलाएं स्वयं सड़कों पर उतरकर शराब भट्टी हटाने की मांग कर रही हैं, तब प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संवेदनशीलता से निर्णय लेना चाहिए।
स्थायी समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला है। उनका कहना है कि शराब भट्टी के आसपास रहने वाले लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि शराब भट्टी हटाने की मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। कलेक्ट्रेट घेराव और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि उनकी लंबे समय से उठ रही मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

