

एफटीके किट से पानी की गुणवत्ता परखने की दी गई जानकारी, 77 कार्यकर्ताओं की बनी यूजर आईडी
मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने
वारासिवनी। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) बालाघाट द्वारा ग्राम स्तर पर पेयजल गुणवत्ता की निगरानी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जनपद पंचायत वारासिवनी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बालाघाट के कार्यपालन यंत्री बी.एल. उइके के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास विभाग के कायदी, दीनी एवं मेंढकी सेक्टर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जल गुणवत्ता परीक्षण की व्यावहारिक जानकारी दी गई। विभाग की केमिस्ट रेखा पटले एवं टीना बिसेन ने एफटीके किट के उपयोग, जल परीक्षण की प्रक्रिया तथा विभिन्न मानकों की जांच के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान 77 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की एफटीके यूजर आईडी भी बनाई गई। यह कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के हरीश झा, शीतल मिश्रा तथा ब्लॉक समन्वयक रानी सिंह राजपूत, श्रुति डहाटे और फनीश रंगारे द्वारा किया गया।

मौके पर किया जल नमूनों का परीक्षण
प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों के आंगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों से लाए गए पानी के नमूनों की एफटीके किट से जांच कराई गई। प्रतिभागियों को पानी में घुले विभिन्न तत्वों की पहचान एवं जल गुणवत्ता का आकलन करने की प्रक्रिया समझाई गई।
एफटीके किट के माध्यम से पानी के पीएच मान, फ्लोराइड, आयरन (लोहा) तथा हार्डनेस (कठोरता) जैसे महत्वपूर्ण मानकों की जांच करना सिखाया गया। कार्यकर्ताओं ने स्वयं परीक्षण कर जल गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझा।

जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर जोर
इस अवसर पर सहायक यंत्री विजय तिवारी ने बताया कि लालबर्रा एवं वारासिवनी उपखंडों के लिए केवल एक प्रयोगशाला होने के कारण सभी गांवों के जल नमूनों की नियमित जांच कर पाना कठिन होता है। इसी उद्देश्य से ग्राम स्तर पर एफटीके किट उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर ही जल गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि मानसून पूर्व प्रत्येक गांव में कुओं, हैंडपंपों एवं नल-जल योजनाओं के जल का परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए, जिससे जलजनित बीमारियों की रोकथाम की जा सके।
उपयंत्री शिवानी शिवात्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने क्षेत्र के पेयजल स्रोतों की वर्ष में कम से कम दो बार—मानसून से पहले और मानसून के बाद—नियमित जांच अवश्य करें।
कार्यक्रम में सहायक यंत्री विजय तिवारी, उपयंत्री शिवानी शिवात्री, जिला समन्वयक शीतल मिश्रा, हरीश झा, ब्लॉक समन्वयक रानी सिंह राजपूत, श्रुति डहाटे, फनीश रंगारे, महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक सरिता वैष्णव तथा परियोजना अधिकारी यशोदा भगत उपस्थित रहीं।
प्रशिक्षण के अंत में कार्यकर्ताओं ने स्वयं जल परीक्षण कर अपने अनुभव साझा किए और इस पहल की सराहना की। विभाग के अनुसार इस अभियान से ग्राम स्तर पर जल गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी तथा आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

