Thursday, June 11, 2026
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24 वर्षों तक कश्मीर बॉर्डर पर देश सेवा के बाद गृह ग्राम पहुंचे सेवानिवृत्त सैनिक सालिकराम मसखरे का भव्य स्वागत

बालाजी नगर में गूंजे भारत माता की जय के नारे, नागरिकों ने श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया सम्मान

मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

वारासिवनी क्षेत्र के बालाजी नगर में उस समय गौरव, सम्मान और देशभक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया, जब भारतीय सेना में 24 वर्षों तक कश्मीर बॉर्डर पर सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त सैनिक सालिकराम मसखरे अपने गृह ग्राम पहुंचे। देश की सीमाओं पर वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में रहकर मातृभूमि की रक्षा करने वाले सैनिक के स्वागत में पूरा गांव उमड़ पड़ा। नागरिकों ने फूल-मालाओं, पुष्पगुच्छों एवं देशभक्ति नारों के साथ उनका आत्मीय अभिनंदन किया।

बालाजी नगर में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय जवान” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। उपस्थित नागरिकों ने कहा कि यह केवल एक सैनिक का सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र सेवा के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है।

सालिकराम मसखरे ने भारतीय सेना में रहकर जम्मू-कश्मीर की संवेदनशील सीमाओं पर महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों एवं विषम परिस्थितियों में वर्षों तक कर्तव्य निभाते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। कठिन मौसम, परिवार से दूरी और निरंतर चुनौतियों के बीच भी उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, साहस और अनुशासन के साथ किया।

सेवानिवृत्ति के बाद गृह ग्राम पहुंचने पर बालाजी नगरवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर राजकपूर रंगारे, रोशनलाल बरेले, जितेंद्र बिसेन, जितेंद्र जैतवार, देवराज बेलेकर, ऋषभ मसखरे, निलेश बौद्ध, महेंद्र बंसोड़, हिमालय देशमुख, मदन रांहगडाले, रुपेंद्र चौहान एवं राम राणा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, युवा, महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय सेना में सेवा देना केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में 24 वर्षों तक सेवा देना किसी भी सैनिक के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को ऐसे सैनिकों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा के लिए आगे आना चाहिए।

समारोह के दौरान युवाओं ने सैनिक जीवन के अनुभव भी सुने। सालिकराम मसखरे ने बताया कि सीमा पर ड्यूटी करना आसान नहीं होता। कई बार जवानों को परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करनी पड़ती है, लेकिन राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि होती है। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम स्थल को तिरंगे रंगों एवं देशभक्ति नारों से सजाया गया था। बच्चों ने सैनिक को सलामी देकर सम्मान व्यक्त किया, वहीं महिलाओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। समारोह के अंत में वरिष्ठ नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों ने सामूहिक रूप से सालिकराम मसखरे को शुभकामनाएं देते हुए श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके पश्चात स्नेहभोज का आयोजन भी किया गया।

बालाजी नगर में आयोजित यह सम्मान समारोह केवल एक सैनिक का स्वागत नहीं, बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र सेवा के प्रति समाज की श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बन गया।

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