
मूकनायक समाचार / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
कोसमी (बालाघाट)। गौतम बुद्ध की 2570वीं जयंती के पावन अवसर पर 1 मई 2026 को त्रिरत्न अंतरराष्ट्रीय बुद्ध विहार, कोसमी में त्रिविध पावन बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, समतामूलक जीवनदर्शन और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।
इस विशेष महोत्सव के आयोजक एवं निवेदक सुनील डोंगरे “अंकुर” द्वारा समस्त बौद्ध अनुयायियों, उपासकों, सामाजिक संगठनों एवं आमजन से इस पावन धम्म आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई है।
बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस कारण वैशाख पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से संसार को अहिंसा, करुणा, समता, मध्यम मार्ग और सत्य के सिद्धांतों से परिचित कराया। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाकर मानवता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
आयोजित महोत्सव का मुख्य उद्देश्य बुद्ध के सिद्धांतों एवं सद्धम्म को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना, सामाजिक समरसता, भाईचारे और समानता का संदेश दिया जाएगा। साथ ही जाति-पांति, भेदभाव एवं कुरीतियों के उन्मूलन हेतु जनजागरूकता का प्रयास किया जाएगा।
त्रिरत्न अंतरराष्ट्रीय बुद्ध विहार में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम के अंतर्गत बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण, धम्म देशना (प्रवचन), ध्यान साधना, विपश्यना, बौद्ध भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा सामाजिक जागरूकता परिचर्चा जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। विद्वान भिक्षु एवं धम्माचार्य अपने प्रवचनों के माध्यम से तथागत बुद्ध के जीवन दर्शन, धम्म और समाज सुधार के संदेशों को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करेंगे।
महोत्सव में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं से सफेद वस्त्र धारण कर आने का अनुरोध किया गया है। सफेद रंग शांति, पवित्रता, सादगी और समानता का प्रतीक माना जाता है, जो बुद्ध के समतामूलक संदेश को दर्शाता है।
कार्यक्रम के आयोजक सुनील डोंगरे “अंकुर”, जो वर्ष 1997 से शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे एक अनुभवी शासकीय विज्ञान शिक्षक हैं, ने अपने संदेश में कहा कि बुद्ध पूर्णिमा केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन को सार्थक दिशा देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज के समय में बुद्ध के विचार समाज को नई दिशा देने में अत्यंत प्रासंगिक हैं और प्रत्येक व्यक्ति को करुणा, विवेक एवं समता के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।
बालाघाट जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में बौद्ध धम्म के प्रति बढ़ती आस्था और सामाजिक चेतना इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान कर रही है। बड़ी संख्या में युवा वर्ग बुद्ध के विचारों से प्रभावित होकर धम्म कार्यक्रमों में भाग ले रहा है, जिससे सामाजिक समता और जागरूकता का विस्तार हो रहा है। कोसमी स्थित त्रिरत्न अंतरराष्ट्रीय बुद्ध विहार क्षेत्र में एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
आज के दौर में जब युवा मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और दिशाहीनता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में बुद्ध का धम्म उन्हें धैर्य, आत्मसंयम, विवेक और करुणा जैसे गुणों से जोड़कर संतुलित जीवन की प्रेरणा देता है।
यह आयोजन समाज में सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता को मजबूत करने का कार्य करेगा। सभी वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर यह महोत्सव “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के सिद्धांत को सार्थक रूप से स्थापित करेगा।
अतः समस्त नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे 1 मई 2026 को त्रिरत्न अंतरराष्ट्रीय बुद्ध विहार, कोसमी (बालाघाट) में आयोजित इस भव्य त्रिविध पावन बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव में सहभागी बनकर भगवान बुद्ध के मानवतावादी संदेशों को अपने जीवन में अपनाएं और समतामूलक समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

