मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मीठा बोलने वाला हर व्यक्ति मित्र नहीं होता और डांटने वाला हर व्यक्ति शत्रु नहीं होता । समाज में हमें दो तरह के लोग मिलते हैं, एक वे जो स्पष्टवादी होते हैं और हमारी गलतियों पर हमें टोकते हैं और दूसरे वे जो चापलूसी की चादर ओढ़कर हमारी जड़ों को खोखला करते हैं। अक्सर लोग अपना काम निकालने के लिए अत्यधिक विनम्र और मीठे बन जाते हैं। ऐसे लोग सामने आपकी तारीफ करेंगे, लेकिन पीठ पीछे आपकी प्रगति में बाधा डालेंगे। वे दीमक की तरह होते हैं, जो अंदर ही अंदर आपके आत्मविश्वास और चरित्र को खत्म कर देते हैं।
माता-पिता, गुरु या सच्चे मित्र वही हैं, जो गलत रास्ते पर चलने पर आपको रोकें और जरूरत पड़़ने पर कठोर शब्द भी कहे । इसलिए सच्चा हितैषी वही है, जो आपकी बुराइयों पर आपको आइना दिखाए, चाहे वह तरीका कितना ही कठोर क्यों ना हो। चिकनी-चुपड़ी बातें करने वाले अक्सर रास्ते से भटका देते हैं, जबकि कड़़वे शब्द बोलने वाले हमें फर्श से अर्श तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

