Saturday, July 25, 2026
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जीवन में कामयाबी का मूल मंत्र संघर्ष ही है क्योंकि बिना चुनौतियों के प्रगति और सफलता हो जाती है अर्थहीन

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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​जीवन का वास्तविक सौंदर्य और उसका मूल्य संघर्ष में ही निहित है। संघर्ष केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की वह धुरी है जिस पर सफलता, प्रगति और व्यक्तिगत विकास का चक्र घूमता है। जिस प्रकार अग्नि में तपे बिना सोना कुंदन नहीं बनता, ठीक उसी प्रकार बिना चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना किए मनुष्य के व्यक्तित्व का निखार संभव नहीं है।यदि बिना किसी प्रयास या बिना किसी बाधा के सफलता मिल जाए, तो उसमें कोई आत्म-संतुष्टि नहीं होती। संघर्ष के बाद मिली जीत ही मन में गर्व और आनंद का भाव भरती है। जब जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, तभी इंसान को अपनी वास्तविक क्षमता, धैर्य और बुद्धि का अहसास होता है।
असफलताएँ और संघर्ष ही हमारे सबसे बड़े शिक्षक हैं। वे हमें सिखाते हैं कि कहाँ सुधार की आवश्यकता है, जिससे हमारी प्रगति अधिक मजबूत और स्थायी बनती है। ​प्रकृति का नियम भी यही सिखाता है—चाहे वह बीज से वृक्ष बनने की प्रक्रिया हो या तितली का अपने खोल से बाहर आना, संघर्ष हर जगह अनिवार्य है। जो लोग संघर्षों से घबराकर पीछे हट जाते हैं, उनका जीवन नीरस और दिशाहीन हो जाता है। अतः जीवन की राह में आने वाली हर चुनौती को एक अवसर मानकर उसका डटकर सामना करना चाहिए, क्योंकि बिना संघर्ष के मिली प्रगति और सफलता वास्तव में अर्थहीन और क्षणिक होती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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