चक्ररभाठा में आंबेडकर जयंती पर निकली भव्य रैली, बसंत कुमार ओंडकार की भूमिका रही प्रमुख
मूकनायक
दिलीप मैश्राम
बिलासपुर।
चकरभाठा क्षेत्र में की 135वीं जयंती के अवसर पर आंबेडकरवादी अनुयायियों द्वारा भव्य एवं ऐतिहासिक रैली का आयोजन किया गया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कार्यक्रम को अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया, जिसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता देखने को मिली। विशेष रूप से युवाओं और बच्चों में जबरदस्त उत्साह नजर आया।
रैली की शुरुआत झूलेलाल मंदिर के सामने स्थित बालीवाल ग्राउंड से हुई, जो वासु मंगलम, सब्जी बाजार, अनुराग स्कूल मार्ग होते हुए गाडगे जी चौक पहुंची। वहां से पूरी चकरभाठा मार्केट का भ्रमण करते हुए रैली का समापन हुआ। पूरे मार्ग में आतिशबाजी, पटाखों और भीम गीतों की गूंज के बीच लोग नाचते-गाते हुए बाबा साहब की
भव्य रैली में अपनी सहभागिता निभाई।
इस आयोजन में भारतीय बौद्ध महासभा, धमनी चकरभाठा के प्रमुख बसंत कुमार ओंडकार की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उनके नेतृत्व और सक्रियता के चलते कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं आकर्षक रूप में संपन्न हुआ। आयोजन की सफलता में उनके प्रयासों की व्यापक सराहना की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हाई कोर्ट अधिवक्ता देव कुमार कनेरी रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बौद्ध समाज के संरक्षक महेश चंद्रिकापुरे, परिनिर्वाण भूमि सम्मान समिति दिल्ली के प्रदेश सचिव एवं बिलासपुर बौद्ध समाज के अध्यक्ष सारंग राव हुमने, तथा समाजसेवी देवेंद्र मोटघरे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन बसंत कुमार ओंडकार एवं सतीश कुमार रात्रे द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत इंदल ओगरे, कन्हैया सोनवानी, विजय पाटिल, अंजोर दास, चुन्नीलाल सिन्हा, राजेंद्र कौशिक, विनय नायक, दीपक ओंडकार और विजय नायक सहित अन्य सदस्यों द्वारा नीला मफलर एवं मोमेंटो भेंट कर किया गया।
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों और समाज के सक्रिय सदस्यों—राजेश हुमने, प्रफुल्ल गेडाम, मनोरंजन मेश्राम, कुणाल रामटेके, नितेश अंबादे, राजा नंदेश्वर, विनोद ऊके, दिलीप मेश्राम, झानेंद्र महिलांगे, प्रदीप बंजारे, रामकुमार कांत, सतीश लाश्कर, संदीप सूर्या, उद्धव नायक, लक्ष्मी नारायण नायक, कुलदीप पाटिल, अभिषेक भांगे, उषा ताई वाहने, मुकेश गोंडाले, रमाबाई नायक, शशि नायक, सुनीता ओंडकार, शीला नायक सहित आसपास के गांवों से आए सैकड़ों आंबेडकरवादी एवं बौद्ध अनुयायियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पूरा आयोजन सामाजिक एकता, जागरूकता और आंबेडकरवादी विचारधारा के प्रसार का प्रतीक बनकर उभरा।



