डोंगरगढ़ में बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर वैचारिक संगोष्ठी, “पे बैक टू सोसाइटी” पर जोर
मूकनायक
दिलीप मैश्राम
डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़
डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर ऑल इंडिया एससी-एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन द्वारा इंजीनियरिंग हॉस्टल ग्राउंड में एक भव्य वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “वर्तमान समय में अम्बेडकरवाद से समाज का सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास कैसे संभव है।”
कार्यक्रम की शुरुआत बौद्धाचार्यों एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, तथागत बुद्ध और बाबा साहेब के चित्रों पर पुष्प अर्पण तथा सामूहिक त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण के साथ हुई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि सुनील भरने (वरिष्ठ बसपा नेता, पार्षद गोंदिया) ने कहा कि “पे बैक टू सोसाइटी” एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे अपनाकर ही समाज का वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने समाज में बढ़ती स्वार्थपरता पर चिंता जताते हुए एकजुटता और जागरूकता का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि इंजीनियर स्नेहा ने अपने संबोधन में शिक्षा संस्थानों में बढ़ते जातिगत भेदभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के पास समय, प्रतिभा और संसाधन होते हैं, जिन्हें समाज के उत्थान में लगाना चाहिए। उन्होंने “पे बैक टू सोसाइटी” के तहत शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान देने की आवश्यकता बताई।
संविधान विशेषज्ञ एडवोकेट अशोक खड़तकर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 की विस्तृत व्याख्या करते हुए समान अवसर और आरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. मनोज गजभिये ने बुद्धा टीचिंग्स फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे धम्म प्रचार, वृक्षारोपण, निःशुल्क पुस्तक वितरण और सामाजिक कार्यों की जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पी.के. शेंडे (मंडल अध्यक्ष) ने की। उन्होंने कर्मचारियों से संगठन से जुड़कर समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया और संगठन को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का मजबूत माध्यम बताया।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों के तहत ड्राइंग, पेंटिंग, गायन और नाटक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिनके प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। अंत में शिवनारायण जी ने आभार व्यक्त किया तथा सभी को धम्मभोज के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, कर्मचारी, महिला प्रतिनिधि और विभिन्न समितियों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास रहा, बल्कि समाज में एकता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सार्थक संदेश भी दे गया।








