मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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घर के सदस्यों में आपसी ईर्ष्या, जलन और द्वेष परिवार को भीतर से खोखला कर देते हैं । ऐेसी नकारात्मकता में घर में पूजा-पाठ या हवन कराना व्यर्थ है, क्योंकि शांति वहीं रहती है, जहॉ घर में कलह की बजाय प्रेम और एकता हो । जब अपनों के प्रति ही जहर घुल जाए तो रिश्तों का टूटना और घर का बिखरना निश्चित है। बाहर के दुःखों से इंसान लड़ लेता है, लेकिन भीतर के क्लेशों का सामना करना उसके लिए सबसे कठिन हो जाता है। अब क्लेश की बात चाहे उसके स्वयं के भीतर की हो या घर के भीतर की, दोनों ही क्लेश एक इंसान को तोड़ने के लिए किसी शस्त्र के समान हैं।
भीतर का युद्ध जीतना इसलिए भी अति कठिन हो जाता है क्योंकि इंसान सबको समझा लेता है लेकिन क्लेश स्वयं के भीतर हो या घर के भीतर, दोनों को समझाना आसान नहीं हो पाता। याद रखना घर के सदस्यों में एक-दूसरे के प्रति अगर ईर्ष्या आ गई तो फिर घर में पूजा कराओ या हवन, घर का टूटना तय है । इसलिए घर को टूटने से बचाने के लिए ईर्ष्या को त्यागकर आपसी प्रेम और संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है। बाहरी पूजा से ज्यादा, आंतरिक पवित्रता जरूरी है ।
बिरदीचंद गोठवाल नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

