मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शब्द मुफ्त में अवश्य मिलते हैं, लेकिन उनके चयन पर निर्भर करता है कि उनकी कीमत मिलेगी या चुकानी पड़ेगी। गन्ने में जहाँ गांठ होती है, वहाँ रस नहीं होता और जहाँ रस होता है, वहाँ गांठ नहीं होती है। बस हमारा जीवन भी ऐसा ही होता है, इसलिये जीवन के संबंधो में हमेशा रस रखना है, गांठ कभी नहीं पड़ेगी।
दुनिया में हर स्तर पर, हर क्षेत्र में गलत को सही साबित करने की जद्दोजहद भी तनाव का एक प्रमुख कारण है। इंसान से गलती होना स्वाभाविक है, लेकिन उस गलती को सही ठहराना भी मानसिक गुलामी है। सही को सही और गलत को गलत मानने का दृष्टिकोण यदि विकसित कर लिया जाए तो समस्याएं बहुत कम हो जाएंगी। इसमें सिर्फ दूसरों का ही नहीं, बल्कि खुद का विश्लेषण भी शामिल है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

