मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज की भागदौड़ भरी दुनिया में जहाँ दिखावा हावी है, वहाँ ईमानदारी और अडिगता एक दुर्लभ गुण बन गए हैं। जिस व्यक्ति का चरित्र कच्चा है, वह छोटे से प्रलोभन या डर से अपना रास्ता बदल लेगा। ऐसा व्यक्ति ना तो लंबे समय तक प्रेम निभा सकता है और ना ही किसी का सच्चा सम्मान कर सकता है। सच्चा सम्मान देने के लिए व्यक्ति का खुद का कद (चरित्र) ऊँचा होना चाहिए। किसी भी रिश्ते की नींव विश्वास पर टिकी होती है। जब हमें पता होता है कि सामने वाला व्यक्ति आज हमारे साथ है, लेकिन कल किसी और बेहतर लाभ के लिए हमें छोड़ सकता है, तो वहां समर्पण की गुंजाइश खत्म हो जाती है। गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लोग अक्सर अल्पकालिक लाभ तो पा लेते हैं, लेकिन वे कभी किसी के दिल में स्थायी जगह नहीं बना पाते।
जो व्यक्ति खुद के मूल्यों और वचनों के प्रति ईमानदार नहीं है, वह दूसरों का क्या होगा? जिसकी प्रकृति में ही ठहराव नहीं है, वह कभी भी किसी का ‘अपना’ नहीं बन सकता। सच्चा प्रेम, मित्रता या सम्मान केवल वही दे सकता है, जिसकी फितरत में ईमानदारी और अडिगता हो। प्रेम, मित्रता और सम्मान ‘सस्ते’ भाव नहीं हैं जिन्हें कहीं से भी खरीदा जा सके। ये उन ‘महंगे’ लोगों के उपहार हैं जिनके पास ईमानदारी का धन और अडिगता का बल है। यदि आपके जीवन में ऐसे लोग हैं, तो उनकी कद्र करें, क्योंकि वे अपनी फितरत से हारकर भी आपका साथ नहीं छोड़ेंगे।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

