*सेवा जोहार*
*जिले से आए सभी संगठनों के पदाधिकारी एवं सगा जनों का सर्व आदिवासी समाज संगठन बालाघाट आभार व्यक्त करता है*, कि समाज की शिक्षिका एवं आदिवासी समाज के मान सम्मान अस्मिता एवं अधिकारों पर चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ लामबंद होकर समाज की आवाज बुलंद करने वाले आप सभी ने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाया । आगामी समय में रणनीति के अनुसार आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा ,अगर ज्ञापन में दिए गए अल्टीमेटम अनुसार निश्चित समय पर न्याय हमें नहीं मिला तो उग्र आंदोलन की तैयारियों के लिए आप सभी का सहयोग अति महत्वपूर्ण है, हमें इस लड़ाई को अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाना होगा ,अब हमें हमारी मांग अनुसार जिला कलेक्टर को हटाना साइबर क्राइम अपराध, श्रेणी एवं अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत कार्यवाही कर अंतिम न्याय मिलने तक हम चैन से नहीं बैठेंगे ,ताकि आने वाले समय में हमारे समाज के किसी भी छोटे से बड़े कर्मचारी या समाज के किसी भी व्यक्ति पर भेदभाव पूर्ण दुर्भावनावश किसी भी कार्यवाही के लिए हर अधिकारी हर वह शख्स जो हमारे साथ शोषण अत्याचार अनाचार करने के लिए 10 बार सोचेगा, आप सभी से सहयोग की आशा उम्मीद हमेशा रहेगी समाज की हर समस्याओं को लेकर सर्व आदिवासी समाज संगठन बालाघाट हमेशा हर पल आदिवासी समाज की हर ज्वलन्त समस्याओं पर न्याय के लिए समाज की आवाज बुलंद करने के लिए कर्तव्यबद्ध है ,क्योकि इस संगठन का उद्देश्य यह भी है । सर्व आदिवासी समाज में संगठनवाद वर्चस्ववाद, व्यक्तिवाद, क्षेत्रवाद, राजनीतिकवाद, स्वार्थवाद से परे हटकर है । विगत वर्षों पूर्व झाम सिंह धुर्वे फर्जी नक्सली एनकाउंटर मामले में न्याय दिलाने के लिए इस संगठन का गठन इस बात को लेकर किया गया है, कि हमारा आदिवासी समाज विभिन्न संगठनों में बिखरा हुआ है इसलिए समाज के एकीकरण के लिए एक संगठित ताकत के लिए जिले में सक्रिय सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों को मेंबर के रूप में शामिल किया गया है, ना की किसी व्यक्ति विशेष को और इस संगठन की कार्यप्रणाली जिला कोर कमेटी की आम सहमति से संचालित की जाती है ना की किसी व्यक्ति विशेष के रूप में , इस जिला कोर कमेटी में जिले के दसों ब्लॉक से सक्रिय अन्य सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों की पदाधिकारियों की भूमिका होती है, यह इसलिए लिखा जा रहा है कि इस संगठन को लेकर बहुत से लोगों के मन में प्रतिक्रियाएं चलती रहती है ,और इस इस संगठन की कार्यप्रणाली एवं गठन के बारे में जानकारी ना होने पर शंका जाहिर कर व्यवधान पैदा किया जाता रहा है, अब हम आदिवासी समाज किसी भी समझो तो को स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि देखा गया है कि पिछले कई सालों से हम हर समस्याओं पर आश्वासन और समझौता पर अमल करते हैं जिससे समाज को कभी अंतिम न्याय नहीं मिला है, इसलिए
*हर जोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष ही हमारा नारा है*
*अंतिम न्याय पाना ही ,लक्ष्य हमारा है।*
*हुल जोहार ,उलगुलान जारी रहे*

