मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान का जीवन एक रंगमंच है, जहाँ हर व्यक्ति अपनी एक विशिष्ट भूमिका निभाता है। इस यात्रा में हमारा सामना मुख्य रूप से दो प्रकार के लोगों से होता है, एक वे जो हमारे जीवन को खुशियों से भर देते हैं और दूसरे वे लोग जो वक्त आने पर अपना रंग बदल लेते हैं। जो लोग हमारे जीवन में निस्वार्थ प्रेम और सकारात्मकता लाते हैं, वे हमारे अस्तित्व का आधार स्तंभ होते हैं। जब हम मुश्किल दौर से गुजरते हैं, तो उनका साथ हमें मानसिक शांति और सुरक्षा का अहसास कराता है जिससे हमें आगे बढ़़ने का साहस मिलता है। दूसरी ओर, वे लोग हैं जो अक्सर स्वार्थवश अपना व्यवहार बदल लेते हैं। हालांकि उनका गिरगिट की तरह रंग बदलना हमें शुरुआती तौर पर आहत करता है, लेकिन भविष्य में यही व्यवहार हमारे लिए सबसे बड़ा सबक साबित होता है।
इसलिए हर किसी पर आँख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए, धोखे और विश्वासघात का सामना करने के लिए खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाएं । वैसे देखा जाए तो दोनों ही प्रकार के लोग हमारे व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। खुशियाँ देने वाले लोग हमें ‘जीना’ सिखाते हैं, तो रंग बदलने वाले लोग हमें ‘दुनियादारी’ भी सिखाते हैं क्योंकि बिना कड़़वे अनुभवों के हम कभी भी सही और गलत की पहचान करने में सक्षम नहीं हो पाते।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

