========================सामाजिक संगठन मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा द्वारा बालको केंद्रीय कार्यालय में विदेशी अंग्रेजो से भारत देश को 15 अगस्त के दिन मिली आजादी के 75 वर्ष होने के अमृत महोत्सव के तहत कुछ सादे कार्यक्रम का आयोजन जिला संयोजक क्रांति कुमार साव और जिला सचिव रजनी महानंद ने किया गया। मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान के जालोर में प्राइवेट स्कूल के 8साल के हिन्दू मूलनिवासी मासूम बालक इन्द्र द्वारा एक राजपूत हिन्दू हेड मास्टर के घड़े को छूकर पानी पी लेने के कारण उसकी पीट पीट कर की गई जघन्य हत्या के दुख़ ने पूरे आजादी के महोत्सव की पोल खोलकर रख दिया है।आज पूरा देश ही नहीं तो सारी दुनिया के सभ्य लोग भारत में हिन्दू धर्म के नाम पर चल रहे जातिवादी आतंकवाद और शैतानियत को देख और समझ रहे हैं।कितनी भयानक बात है कि केंद्र की सत्ता में काबिज भाजपा इस शैतानी यत को अब हिन्दू राष्ट्रवाद से जोड़कर भारतीय समाज में हिंसा,नफरत और दुराचार का गुंडा राज कायम करने पर आमादा है।सोचिए कि एक हेड मास्टर जातिवाद के जहर में कितना दरिंदा हो सकता है।इसीलिए भारत रत्न डॉ आंबेडकर ने कहा था हिन्दू धर्म का सुधार संभव नहीं यही कारण उन्होंने भारत के सनातन मूल बौद्ध धर्म में वापसी के आंदोलन की नीव रखे।बौद्ध धर्म न केवल भारत देश का हजारों वर्षों तक राष्ट्र धर्म रहा बल्कि विश्व का गौरवशाली गुरु धर्म रहा और आज भी दुनिया के संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित सर्वश्रेष्ठ धर्म माना गया है।बाबा साहब अम्बेडकर को भी स्कूल के घड़े को छूकर पानी पीने की इजाजत हिन्दू धर्म में नहीं थी किन्तु उनकी हत्या इसलिए नहीं की गई क्योंकि उस समय अंग्रेजो का शासन था और सबसे बड़ी बात थी कि उनको उनके माता पिता ने समझाया था कि ओ हिन्दू नहीं अछूत हैं इसलिए बाबा साहब खुद ही कई दिनों तक स्कूल में बिना पानी पिए ही शिक्षा ग्रहण करते रहे या कोई उनको ऊपर से पानी पिला देता था।किन्तु गांधी जी के कठिन आग्रह पर देश के 25% अनुसूचित जाति,जन जाती के लोगों ने अंग्रेजो द्वारा दिए गए कम्युनल एवार्ड या प्रथक निर्वाचन के अधिकार को बाबा साहब अम्बेडकर और गांधीजी के बीच पुना समझौते के तहत संयुक्त निर्वाचन आरक्षण में बदल दिया।आज ये दलित वर्ग सोचते हैं कि वो भी हिन्दू एक समान हैं उनके बच्चे भी यही सोचते हैं सब हिन्दू समान हैं किन्तु अब भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के अंदर जातिवादी शैतानी दिमाग अब फिर से सत्ता में आते ही देश भर में हिन्दू,मुसलमान ,जाती पाती ,महिला ,पुरुष के बीच हिंसा और नफरत फैला रहे हैं।आज मानलो उस एक राजपूत शिक्षक को फांसी की सजा मिल जाए और मृतक बच्चे के परिवार को 1 करोड़ रुपए और एक नौकरी मिल जाए तो क्या छुआछूत की समस्या समाप्त हो जाएगी..? भारत में आजादी के 75 वर्षों में छुआछूत के न जाने कितने लाखो कांड हुए होंगे तो इसका समाधान क्या है ..इसका समाधान केवल कड़े कानून से नहीं बल्कि इसकी मुख्य जड़ ही जातिवादी हिन्दू धर्म है।जब तक सवर्ण और अवर्ण मिलकर इसका बहिष्कार करके अपने नैतिकता और प्रमाण पर आधारित बौद्ध धर्म को स्वीकार नहीं करते तब तक यह समस्या बनी ही रहेगी।यदि 1% विदेशी मूल के ब्राह्मण नहीं चाहते कि ओ बौद्ध बने तो बाकी भारतीय मूल के ब्राह्मण सुर 95 % गैर ब्राह्मणों को भारत की उन्नति और एकता के लिए बौद्ध बनना चाहिए ।किन्तु ये लोग भी तभी बनेंगे जब एस सी,एस टी के लोग बड़े पैमाने पर सामूहिक बौद्ध धर्म घर वापसी करेंगे।भारतवासियों को जब भी भारत राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा पैदा हो तो बौद्ध धम्म ही आखिरी रास्ता है ये समझना होगा।
सभा को मोर्चा के जिला संयोजक क्रांति कुमार साव,प्रदेश सचिव मीरा पोर ते,बालको अध्यक्ष प्यारे दास महंत,उपाध्यक्ष रूपा महिलांगे ,जिला सचिव रजनी महानंद,महिला अध्यक्ष रीमा नवरंग,परसा भांटा अध्यक्ष गायत्री साहू,कोषाध्यक्ष सुकन्या साहू,ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष पार्वती गोंड,बालको सचिव लता जांगड़े,फूलचंद जांगड़े,बालको संगठन सचिव बरतदास महंत ने भी संबोधित किया।इस कार्यक्रम में राष्ट्र ध्वज का सम्मान करने हुए राष्ट्रगान के साथ ही नैतिक मानव की स्थापना के लिए बुद्ध वंदना भी की गई।आयोजकों ने सबके लिए चाय नाश्ते का प्रबंध किया था।बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों ने भी भाग लिया।

