Thursday, February 26, 2026
Homeदेशइंसानियत, दया और करुणा ही वह वास्तविक धन है, जो ना केवल...

इंसानियत, दया और करुणा ही वह वास्तविक धन है, जो ना केवल हमारे व्यक्तित्व को निखारता है, बल्कि समाज को जोड़ने में होता है सहायक

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
आज की भागती-दौड़ती और भौतिकतावादी दुनिया में जहाँ लोग धन-दौलत के पीछे भाग रहे हैं, वहाँ इंसानियत, दया और करुणा ही वे असली रत्न हैं जो हमारे चरित्र को निखारते हैं। संसार में जन्म लेना एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन एक ‘इंसान’ बनना एक साधना है। मनुष्य को अन्य जीवों से जो बात अलग बनाती है, वह उसकी सोचने की क्षमता ही नहीं, बल्कि उसके हृदय की कोमलता है। इंसानियत, दया और करुणा वे गुण हैं, जो किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आधार होते हैं। यह वह संपत्ति है जिसे ना तो कोई चुरा सकता है और ना ही समय के साथ इसका मूल्य कम होता है।
महात्मा बुद्ध, गुरु रविदास, मदर टेरेसा और नेल्सन मंडेला जैसे अनेक महान व्यक्तित्वों ने दुनिया को सिखाया कि दया और करुणा से कठिन-से-कठिन हृदय को भी जीता जा सकता है।
हर पड़ाव पर साथ रहने वाली भौतिक संपत्ति (पैसा, गाड़ी, मकान) अस्थाई होती है। संकट के समय या वृद्धावस्था में धन हमें सुविधा तो दे सकता है, लेकिन मानसिक शांति और संतोष केवल हमारे द्वारा किए गए नेक कार्यों से मिलता है। जिस समाज में दया और करुणा का अभाव होता है, वह समाज भीतर से खोखला हो जाता है । अंततः, इंसानियत, दया और करुणा वह प्रकाश है, जो कठिन समय में भी हमारे मार्ग को आलोकित रखता है। यदि हमारे पास ये तीन गुण हैं, तो हम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments