मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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“किसी जमाने में एक दूसरे के कांटे निकाले जाते थे, दुख सुख में सहयोग किया जाता था, अब तो एक दूसरे की राह में कांटे बिछाए जाते हैं” – यह वाक्य वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में मानवीय मूल्यों के ह्रास को बखूबी दर्शाता है। एक समय था, जब लोग निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते थे और आज का वह समय है, जब ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा के कारण लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं । जहाँ कभी मानवीय संबंधों की नींव सहयोग, संवेदना और निःस्वार्थ प्रेम पर टिकी थी, वहीं आज प्रतियोगिता और ईर्ष्या ने उन दीवारों को हिला कर रख दिया है।
आधुनिक युग में स्वार्थ, ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा ने लोगों के मन में स्वार्थ भर दिया है। लोग अपनी तरक्की के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं हिचकिचाते। एक दूसरे की राह में कांटे बिछाने से समाज में तनाव, अविश्वास और असुरक्षा का माहौल बनता है, जो अंततः सबका नुकसान करता है। इसलिए समाज को फिर से एक दूसरे के सहयोग के लिए आगे आना होगा। प्रेम, सहानुभूति और आपसी समझ को बढ़ावा देने से ही हम इस “कांटे बिछाने” की प्रवृत्ति को बदल सकते हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि एक-दूसरे का सहयोग करने से ही हम सभी मिलकर उन्नति कर सकते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

