Thursday, February 26, 2026
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स्वार्थ के लिए किसी का दिल दुखाना है एक मानसिक और भावनात्मक हिंसा

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर ‘हिंसा’ शब्द सुनते ही हमारा ध्यान शारीरिक चोट या झगड़े की ओर जाता है, लेकिन वास्तव में किसी के दिल को ठेस पहुँचाना उससे कहीं अधिक गहरी हिंसा है। जब हम अपने निजी लाभ, अहंकार या स्वार्थ के लिए किसी की भावनाओं के साथ खेलते हैं तो हम उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर प्रहार करते हैं। हिंसा केवल शरीर तक सीमित नहीं है, मन में उठने वाले नकारात्मक विचार और कड़़वे बोल भी हिंसा का ही रूप हैं। शारीरिक घाव समय के साथ तो भर जाते हैं, लेकिन भावनात्मक चोटें व्यक्ति के व्यक्तित्व को भीतर से तोड़़ देती हैं ।
वहीं जो व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को कष्ट देता है, वह अपने मानसिक शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा को खो देता है। स्वार्थ में अंधा होकर बोला गया एक झूठ या किया गया विश्वासघात किसी के भरोसे को उम्रभर के लिए खत्म कर सकता है। सच्ची मानवता इस बात में है कि हम दूसरों की भावनाओं का उतना ही सम्मान करें जितना हम अपनी भावनाओं का करते हैं। अहिंसा का अर्थ केवल किसी को ना मारना नहीं, बल्कि किसी को मानसिक कष्ट ना देना भी है। अंततः, स्वार्थ की बुनियाद पर खड़ी जीत हमेशा खोखली होती है, जबकि दूसरों के प्रति संवेदनशीलता ही सच्चे चरित्र का निर्माण करती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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