मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पिता के पसीने की महक उस कठोर परिश्रम का प्रमाण है, जो उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए किया होता है। जब एक संतान यह याद रखती है कि उसके पिता ने उसकी सुख-सुविधाओं के लिए हमेशा कड़कड़ाती सर्दी, चिलचिलाती धूप और मुश्किलों का समय समय पर सामना किया है, तो उसमें कृतज्ञता का भाव जागृत होता है। यह भावना उसे किसी भी ऐसे कार्य को करने से रोकती है, जिससे उसके पिता के सम्मान को ठेस पहुँचे। घर की आर्थिक तंगी या अभाव की यादें व्यक्ति को जीवन की सच्चाइयों से अवगत कराती हैं जिसने अपने माता-पिता को कम संसाधनों में भी परिवार का पालन-पोषण करते देखा है, वह जीवन के मूल्यों और चुनौतियों को बेहतर ढ़ंग से समझता है।
यहां यह गौरतलब है कि जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति आती है, तो परिवार के संघर्ष की वे स्मृतियाँ एक प्रेरणा का काम करती हैं। माता-पिता का संघर्ष यह याद दिलाता है कि वर्तमान स्थिति पूर्वजों के परिश्रम का परिणाम है और उस विरासत को सम्मान के साथ आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। यह भावना व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सचेत करती है। अपनी जड़ों और माता-पिता के संघर्ष को याद रखना व्यक्ति के भीतर एक मजबूत आधार तैयार करता है। यह यादें जीवन की यात्रा में एक मार्गदर्शक शक्ति का काम करती हैं, जो व्यक्ति को अपनी मेहनत और संघर्ष के महत्व को समझने में मदद करती हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

