Thursday, February 26, 2026
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सखावदा में घटिया इंटरलॉकिंग निर्माण से ग्रामीणों में उबाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग ।

मूकनायक राजस्थान बूंदी

संवाददाता विष्णु प्रसाद बैरवा

लाखेरी – बूँदी जिले लाखेरी क्षेत्र के बड़ागांव (जिला बूंदी) शखावदा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के भारी दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने पंचायत में कराए जा रहे इंटरलॉकिंग सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों को घटिया बताते हुए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये का बजट खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है बल्कि आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।घटिया गुणवत्ता, महीनों में उखड़ रही इंटरलॉकिंग ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में पूर्व में बनाए गए अधिकांश इंटरलॉकिंग कार्य पूरी तरह टूट-फूट का शिकार हो चुके हैं। कई स्थानों पर सड़कें एक वर्ष भी नहीं टिक पाईं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी को कई बार मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है ।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा काली बजरी के उपयोग पर प्रतिबंध के बावजूद पंचायत क्षेत्र में बिना रॉयल्टी काली बजरी का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, निर्माण सामग्री में लगभग 70 प्रतिशत मिट्टी मिलाकर कार्य कराया जा रहा है, जिससे निर्माण शुरू से ही कमजोर हो रहा है और कुछ ही समय में नष्ट हो जाता है।ठेकेदार अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों, सरपंच एवं संबंधित अधिकारियों की आपसी मिलीभगत के कारण अब तक किसी भी स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी है। सेक्रेटरी की कथित मेहरबानी से शिकायतों को दबाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।पांच वर्षों से जारी घटिया निर्माण का सिलसिला ग्रामीणों के अनुसार शखावदा ग्राम पंचायत में पिछले पांच वर्षों से लगातार इंटरलॉकिंग कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी निर्माण टिकाऊ सिद्ध नहीं हुआ। पूर्व में मस्तराम मीणा सकेद्री के कार्यकाल में कराए गए निर्माण कार्य भी घटिया थे। इसके बाद तत्कालीन सेक्रेटरी मस्तराम मीणा के कार्यकाल में हुए कार्य भी एक वर्ष से अधिक नहीं टिक पाए। वर्तमान में सेक्रेटरी सतवीर सिंह के कार्यकाल में भी वही स्थिति बनी हुई है और घटिया निर्माण का सिलसिला जारी है।धरना-प्रदर्शन की चेतावनी लगातार अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे पंचायत समिति कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के खिलाफ निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। जबकि शाखवदा पंचायत में इंटरलॉकिंग का कार्य चलते हैं तो वहां पर हमेशा पंचायत के सरपंच साहब राजेश कुमार मीणा वर्तमान में पूरे कार्य पर निर्भर हमेशा 24 घंटे खड़े रहते हैं फिर भी उनकी निगाहें में मिट्टी से बना इंटरलॉकिंग शोभा देता है l इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि वे मौके पर जांच कर चुके हैं। जांच के दौरान यह सामने आया है कि निर्माण में लाई गई बजरी में लगभग 70 प्रतिशत मिट्टी पाई गई है। उन्होंने कहा कि मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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