मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हर इंसान का संसार को देखने का नजरिया अलग होता है। एक ही घटना दो अलग-अलग लोगों के लिए अलग अनुभव पैदा कर सकती है। जैसे, एक ही बारिश किसी के लिए ‘रोमांटिक’ हो सकती है, तो किसी ऐसे व्यक्ति के लिए ‘कष्टदायक’ भी है, जिसका घर टपक रहा हो। यहाँ दोनों के अनुभव सही हैं और तर्क यहाँ काम नहीं करता क्योंकि अनुभव भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक धरातल पर होते हैं। समाज में सामंजस्य बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि हम दूसरों के अनुभवों का सम्मान करें, भले ही वे हमारे तर्क की कसौटी पर खरे ना उतरते हों ।
निजी अनुभव जीवन का अमूल्य हिस्सा हैं, जो हमें गहराई से सिखाते हैं और हमारे व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। वे कहानी कहने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम हैं, लेकिन वे तर्क का विकल्प नहीं बन सकते। तर्क हमें व्यापक दृष्टिकोण देता है और अनुभवों को एक व्यवस्थित ज्ञान में बदलने में मदद करता है। इसलिए हमें अपने अनुभवों से सीखना चाहिए और उन्हें दूसरों के साथ साझा करना चाहिए, लेकिन उन्हें सार्वभौमिक तर्क के रूप में थोपने के बजाय, उन्हें अन्य दृष्टिकोणों और तर्कों के साथ संतुलित करना चाहिए ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

