Thursday, February 26, 2026
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स्वार्थ के लिए झूठ का सहारा लेने की बजाय सच्ची शिक्षा वह है जो इंसान को सच बोलने का साहस दे और करना सिखाए दूसरों का सम्मान

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के दौर में हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं, जहाँ विरोधाभास हमारी जीवनशैली बन चुका है। हम सभी यह दावा करते हैं कि हमें ‘झूठ’ से नफरत है और हमें झूठ बर्दाश्त नहीं होता, लेकिन व्यावहारिक धरातल स्तर पर शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अपने स्वार्थ के लिए झूठ का सहारा ना लेता हो। यह दोहरा मापदंड हमारी नैतिकता के पतन का सबसे बड़ा प्रमाण है। आज की शिक्षा पद्धति केवल एक अंधी दौड़ बनकर रह गई है। बचपन से ही बच्चों को ‘अव्वल’ आने की शिक्षा दी जाती है, लेकिन यह नहीं सिखाया जाता कि ‘इंसान’ कैसे बना जाए।
लोग किताबी ज्ञान तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन ‘जीवन का ज्ञान’ भूल जाते हैं। एक-दूसरे को नीचा दिखाना हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है। हम दूसरों की कमियाँ खोजने में इतने व्यस्त हैं कि अपनी कमियों को सुधारने का समय ही नहीं रहता। सच्ची शिक्षा वह है, जो हमें सच बोलने का साहस दे और दूसरों का सम्मान करना सिखाए। यदि आधा जीवन पढ़ाई में बिताने के बाद भी हम केवल दूसरों को नीचा दिखाना ही सीख पाए हैं, तो हमें अपनी साक्षरता पर फिर से विचार करने की जरूरत है। समाज की प्रगति तब तक संभव नहीं है, जब तक हम झूठ का त्याग कर ईमानदारी और सहानुभूति को अपने जीवन का आधार नहीं बनाते।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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