मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक अनिश्चित यात्रा है, जिसमें हर कदम पर सही दिशा और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इस जीवन यात्रा में माता-पिता का मार्गदर्शन अनमोल होता है। उनका अनुभव, निस्वार्थ प्रेम और हमारी भलाई की इच्छा अद्वितीय है। एक बच्चा जब चलना सीखता है तो माता-पिता ही उंगली पकड़कर सहारा देते हैं। जीवन के हर मोड़ पर, चाहे वह शिक्षा का चुनाव हो, करियर का फैसला हो या नैतिक मूल्यों को समझना, माता-पिता का अनुभवी ज्ञान हमें गलतियों से बचाता है। उनकी सलाह में कोई स्वार्थ नहीं होता, बल्कि उसमें केवल हमारे उज्ज्वल भविष्य की कामना होती है। वे हमारे सबसे बड़े हितैषी और पहले शिक्षक होते हैं, जिनका मार्गदर्शन हमें सुरक्षित रखता है।
वहीं किताबें ज्ञान का अथाह सागर हैं। वे सदियों के ज्ञान, अनुभवों और विचारों को संजोकर रखती हैं। एक अच्छी किताब एक मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। किताब हमें दुनिया के महानतम व्यक्तियों के जीवन से सीखने का अवसर देती हैं और हमारी सोच का दायरा बढ़ाती हैं। किताबें हमें विभिन्न संस्कृतियों, इतिहास और विज्ञान के बारे में जानकारी देती हैं, जिससे हमारा मानसिक और बौद्धिक विकास होता है। यह कहावत इस बात पर ज़ोर देती है कि जीवन में सच्चा और विश्वसनीय साथी हमेशा ज्ञान और अनुभव का भण्डार होते हैं क्योंकि माता-पिता का प्यार और मार्गदर्शन एक नींव की तरह है, जबकि किताबें ज्ञान के भंडार की तरह हैं। दोनों मिलकर एक व्यक्ति को एक जिम्मेदार, दयालु और सफल व्यक्ति बनने में मदद करते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

