मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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लोग अक्सर एक सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के पास जाना पसंद करते हैं क्योंकि सुंदरता ध्यान खींचती है और एक प्रारंभिक सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है, परंतु यह आकर्षण बहुत कम समय के लिए रहता है। यदि सुंदर मुख से निकले इंसान के शब्द कठोर, अपमानजनक या नकारात्मक होते हैं, तो वह प्रारंभिक आकर्षण तुरंत खत्म हो जाता है। कड़वी जुबान वह तलवार है, जो बिना खून बहाए गहरे घाव करती है। ऐसे व्यक्ति जो हमेशा दूसरों का अपमान करते हैं, ताने मारते हैं या कठोर शब्दों का प्रयोग करते हैं, उनसे लोग दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। उनके आसपास का माहौल तनावपूर्ण और नकारात्मक हो जाता है। भले ही उनका रूप-रंग कितना भी मनमोहक क्यों न हो, उनकी कड़वी बोली के कारण लोग उनसे बात करने से कतराते हैं। सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों में मधुरता की आवश्यकता होती है, जिसे कड़वी जुबान वाले लोग कभी पूरा नहीं कर पाते।
इसके विपरीत, एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति भी यदि मीठा बोलता है और दूसरों का सम्मान करता है तो वह अनगिनत लोगों के दिलों में जगह बना लेता है। मधुर वाणी एक चुंबक की तरह काम करती है, जो लोगों को अपनी ओर खींचती है। इसलिए असली सौंदर्य आत्मा का सौंदर्य है, जो हमारी बातों और व्यवहार से झलकता है। शारीरिक सुंदरता प्रकृति की देन हो सकती है, लेकिन वाणी पर नियंत्रण रखना और उसे मधुर बनाना हमारे अपने हाथ में है। यदि हम चाहते हैं कि लोग हमें पसंद करें और हमारे साथ संबंध बनाए रखें तो हमें अपनी जुबान को मीठा और सम्मानजनक बनाना होगा। बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि चेहरा कितना भी सुंदर हो, कड़वी जुबान सारी सुंदरता पर पानी फेर देती है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

