मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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परिश्रम और आत्मविश्वास, सफलता के दो मजबूत स्तंभ हैं। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना परिश्रम के आत्मविश्वास का जन्म नहीं हो सकता और बिना आत्मविश्वास के परिश्रम की दिशा तय नहीं हो सकती। जीवन में हर व्यक्ति सफल होना चाहता है, लेकिन सफलता केवल चाहने से नहीं मिलती । इसके लिए कठिन मेहनत और खुद पर गहरा विश्वास होना बेहद ज़रूरी है। परिश्रम और आत्मविश्वास दो ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं जो इंसान को सफलता की ओर ले जाते हैं। इस दुनिया में महान वैज्ञानिक, खिलाड़ी और नेता निरंतर परिश्रम करके ही ऊँचाइयों तक पहुँचे हैं।
परिश्रम से मनुष्य का आत्मविश्वास बढ़ता है और उसमें धैर्य, लगन और सहनशीलता जैसे गुण विकसित होते हैं। आलसी व्यक्ति ना तो स्वयं खुश रह सकता है, ना ही दूसरों को खुश रख सकता है। इसलिए कहा गया है कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। सफलता की राह में परिश्रम और आत्मविश्वास दोनों ही आवश्यक हैं। परिश्रम वह नींव है, जिस पर सफलता की इमारत खड़ी होती है और आत्मविश्वास वह रोशनी है, जो उस इमारत को रोशन करती है। हमें हमेशा इन दोनों गुणों को अपनाना चाहिए क्योंकि यही हमें जीवन की हर चुनौती का सामना करने और अपने सपनों को साकार करने में मदद करते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

