मूकनायक /आकाश घरडे़
बालाघाट/ मध्यप्रदेश
बालाघाट। भीम आर्मी जिला बालाघाट के तत्वाधान में 30 सितंबर को एक भव्य “संगठन बनाओ अभियान एवं विशाल जन संवाद” का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन बहुजन समाज के एकता और जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मा. सुनील बैरसिया जी, प्रदेश अध्यक्ष भीम आर्मी मध्य प्रदेश, विशेष रूप से पधारे। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि “संगठन ही समाज का भविष्य है और जब तक हम एक मजबूत संगठन के रूप में नहीं जुड़ेंगे, तब तक हमारी आवाज सुनी नहीं जाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और दलित-बहुजन समुदाय के उत्थान के लिए संगठन बनाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विभिन्न भाषण, विचार विमर्श और एकता के संदेश साझा किए गए। आयोजन में सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते हुए उपस्थित कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, रोजगार, जातीय भेदभाव और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे मूकनायक अखबार के प्रदेश प्रभारी हाजी शोएब खान ने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समाज में जागरूकता और समानता की अलख जगाने के लिए मूकनायक अखबार का प्रकाशन किया था। यह अखबार केवल समाचार का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक आंदोलन और वंचित समाज की आवाज को बुलंद करने का ऐतिहासिक मंच था।
उन्होंने कहा कि उस दौर में जब दबे-कुचले वर्ग की कोई सुनने वाला नहीं था, तब बाबा साहेब ने कलम को हथियार बनाया और पत्रकारिता के माध्यम से अन्याय और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत की।
हाजी शोएब खान ने कहा कि बालाघाट में बहुजन समाज के कार्यक्रमों को और आंदोलन , हम लोग प्रकाशित करेंगे सामाजिक आंदोलन और बहुजन समाज की एकता को मजबूत करने के लिए बाबा साहेब ने मूकनायक जैसे अखबार समाज की असली आवाज हैं, जिन्हें और मजबूती देने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर समाज को सशक्त बनाना है तो शिक्षा, संगठन और संघर्ष की तर्ज पर मीडिया को भी जन-आंदोलन का हिस्सा बनाना होगा।
बालाघाट में आयोजित “संगठन बनाओ अभियान” एक ऐतिहासिक कार्यक्रम साबित हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाग लेकर भाईचारे और एकता का संदेश दिया। यह कार्यक्रम सिर्फ संगठन निर्माण का नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द्र ,(शांतिपूर्ण) और सहयोग की भावना को मजबूत करने का एक सुंदर प्रयास था।
कार्यक्रम में मुस्लिम समाज, ईसाई समाज, आदिवासी समाज, तथा अन्य विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी ने मिलकर एक मंच पर आकर यह दिखाया कि भले ही हमारी संस्कृति, धर्म और रीति-रिवाज अलग हों, पर एकता और भाईचारे की भावना हमें एक-दूसरे से जोड़ती है। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक विकास और शक्ति तभी संभव है जब विभिन्न समाज एक-दूसरे के साथ सहयोग करें और अपने बीच के मतभेदों को भूलकर एक साथ आगे बढ़ें।
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ताओं ने कहा कि “संगठन बनाना केवल नाम का आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक नई दिशा तय करने का कदम है।” उन्होंने जोर देमकर कहा कि संगठन बनाकर हमें न केवल अपने सामाजिक हितों की रक्षा करनी है, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना एकजुट होकर करना है।
भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष रितेश बोरकर ने कहा कि बहुजन समाज का वास्तविक उत्थान तभी संभव है, जब समाज राजनीति में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सत्ता में पहुंचे। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी बहुजन समाज सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है, जिसका मुख्य कारण सत्ता में उनकी भागीदारी का अभाव है।
रितेश बोरकर ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ आंदोलन और धरना-प्रदर्शन से समाज की दशा और दिशा नहीं बदलने वाली। जब तक बहुजन समाज अपने प्रतिनिधियों को आगे लाकर शासन-प्रशासन की नीतियों में भागीदारी नहीं करेगा, तब तक उत्थान अधूरा ही रहेगा।
उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “राजनीतिक शक्ति ही समाज के उत्थान की सबसे बड़ी कुंजी है।” आंबेडकर ने हमेशा शिक्षा, संगठन और संघर्ष का मंत्र दिया और सत्ता में भागीदारी पर जोर दिया था
बोरकर ने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा हासिल कर राजनीति और प्रशासन में सक्रिय हों। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बहुजन समाज को जागरूक होकर अपनी ताकत का एहसास कराना होगा, तभी उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और समाज आगे बढ़ेगा।
इस कार्यक्रम में महिला मंडल की ओर से श्रीमती अनामिका मेश्राम ने कहा कि संगठन को और मजबूत तथा कारगर बनाने के लिए महिला शक्ति को आगे आना होगा इसके लिए हमें अपनी पूरी ताकत से काम करने और महिलाओं को संगठन में जोड़ने का काम करना होगा
भीम आर्मी के पूर्व जिला अध्यक्ष अंकुश चौहान ने बिरसा तहसील के जामुल गांव में आदिवासी समाज के साथ हुए अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ अपनी सशक्त आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित करना और उनके साथ सामाजिक-आर्थिक स्तर पर भेदभाव करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अंकुश चौहान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जामुल गांव के आदिवासी लंबे समय से अन्याय सह रहे हैं। उनके साथ न केवल सामाजिक भेदभाव किया जा रहा है, बल्कि मूलभूत सुविधाओं में भी उन्हें पिछड़ा रखने की साज़िश की जा रही है। चौहान ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा वंचित और शोषित वर्गों के हक के लिए संघर्ष किया था, और उसी मार्ग पर चलते हुए आदिवासियों को उनका सम्मान दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक संदेश और एकता के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में यह प्रतिज्ञा की कि वे अपने समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

