मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक मिशन है क्योंकि यह हमें लक्ष्य प्राप्त करने और समाज में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है, बेशर्ते कि इसे व्यक्तिगत स्वार्थ और लालच में बर्बाद ना किया जाए। व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर होकर, जीवन को दूसरों की मदद करने, ज्ञान अर्जित करने और समाज के उत्थान में योगदान देने का एक सार्थक मिशन बनाना चाहिए। एक मिशन-आधारित जीवन हमें उद्देश्यों और दिशा प्रदान करता है, जिससे हम अपनी ऊर्जा को व्यर्थ की चीज़ों में लगाने के बजाय सार्थक गतिविधियों पर केंद्रित कर पाते हैं। आज की दुनिया बड़ी तेजी से बदल रही है और विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और विचार के हर क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहा है । यदि कोई व्यक्ति कहे कि बस मैं अब और आगे नहीं बढ़ूंगा तो यह उसका ठहर जाना वास्तव में ठहरना नहीं बल्कि अपने लक्ष्य से पीछे खिसकना होगा ।
जब पूरी दुनिया आगे बढ़ रही हो और आप अपनी जगह खड़े रह जाए तो धीरे-धीरे आप दूसरों से बिछड़ जाते हैं । यह वैसा ही है, जैसे कोई नाव नदी के बहाव में खड़ी रहे । वह आगे नहीं बढ़ेगी तो पानी का बहाव उसे पीछे ले जाएगा । यदि हम अपनी सफलता और सुख सुविधा की ही सोचेंगे तो यह इंसान का निजी स्वार्थ होगा । हमें अपनी सफलता और लक्ष्य प्राप्ति के साथ-साथ समाज की समस्याओं को भी देखना होगा जिसमें भूखे को भोजन कराना, गरीब बच्चों को शिक्षा के प्रति मार्गदर्शित करना और समाज में फैल रही कुरीतियों आदि के निवारण के लिए समाज को जागरूक करना शामिल है । इसलिए आज के दौर में यह समझना होगा की जिंदगी ठहरने के लिए नहीं बल्कि आगे बढ़ाने के लिए है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

