मूकनायक/ राहुल सोनारे
खंडवा /मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने हाल ही में आदेश जारी किया है कि राज्य की सभी पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को ई-केवायसी (इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी) कराना अनिवार्य होगा। विभाग के अनुसार यह कदम योजनाओं में पारदर्शिता लाने और अपात्र लोगों को हटाने के लिए आवश्यक है।
फिलहाल प्रदेश में लगभग 3.50 लाख हितग्राही ऐसे हैं जिनका ई-केवायसी सत्यापन नहीं हो सका है। इन्हें 31 अगस्त 2025 तक अनिवार्य रूप से यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। तय समयसीमा में ई-केवायसी न कराने पर पेंशन रुक सकती है।
कठिनाइयों का बोझ वंचितों पर
ई-केवायसी प्रक्रिया का सबसे बड़ा असर समाज के उसी तबके पर पड़ रहा है जिसके लिए यह योजनाएँ बनी हैं—गरीब, ग्रामीण और दिव्यांगजन।
बहुत से हितग्राही प्रक्रिया और दस्तावेजों के बारे में जानते ही नहीं।
अधिकांश ग्रामीण परिवारों के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट जैसी तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं।
पढ़ाई-लिखाई का अभाव होने से फॉर्म भरने और सत्यापन की औपचारिकताएँ मुश्किल बन जाती हैं।
क्या होना चाहिए?
नीति सही हो सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू करने के लिए अतिरिक्त प्रयास जरूरी हैं।
जागरूकता अभियान गाँव-गाँव चलाए जाएँ।
पंचायत और CSC केंद्रों पर शिविर लगाकर ई-केवायसी कराई जाए।
सहायता कर्मियों की नियुक्ति की जाए, जो भाषा व साक्षरता की कमी वाले लोगों की मदद कर सकें।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम पेंशन योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सराहनीय है। लेकिन जब तक तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों का हल नहीं निकलता, तब तक हजारों वंचित हितग्राही लाभ से वंचित रह सकते हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाएगी?

