मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसानियत बहुत बड़ा खजाना है, उसे लिबास (कपड़े) में नहीं, बल्कि इंसान में तलाश करो । लिबास नहीं, इंसान कीमती है । इंसान घर बदलता है, लिबास बदलता है, रिश्ते बदलता है, फिर भी परेशान रहता है क्योंकि वो खुद को नहीं बदलता । लिबास मनुष्य की पहचान का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इंसानियत ही मनुष्य की वास्तविक पहचान है। एक व्यक्ति को हमेशा अपनी इंसानियत को महत्व देते हुए दूसरों के साथ दया, प्रेम और सम्मान से पेश आना चाहिए।
दाद और जायदाद जब हद से ज्यादा हो जाए तो इंसान को खुजली सी मची रहती है । कई इंसान ऐसे देखे हैं, जिनके ऊपर लिबास नहीं होता और बहुत से लिबास भी देखें है जिनके अंदर इंसान नहीं होता। वैसे भी औकात से बड़े दिखावे इंसान को कर्ज में डूबा देते हैं! इसलिए त्याग वहीं करें, जहाँ उसकी कद्र हो, दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं, बल्कि उसका वजूद कम होता है । ये जिंदगी सिर्फ तब तक हल्की हैं, जब तक सारे बोझ घर के मुखिया ने उठाए होते हैं। बाकी:- जिस इंसान ने अपनों को बदलते हुए देखा है, वो जिंदगी में किसी भी दौर से गुजर सकता हैं ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

