नारायण नाथ के नेतृत्व में 36 घंटे की भूख हड़ताल के बाद गवारिया समाज को मिला न्याय
रिपोर्ट: श्रवण कुमार स्थान:जालोर, राजस्थान।
गवारिया समाज के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन बन गया जब 36 घंटे की लंबी भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने उनकी मांगें मान लीं। अब इस समाज के परिवारों को उसी स्थान पर बसाया जाएगा जहाँ वे वर्षों से रह रहे थे — यह निर्णय न केवल उनके संवैधानिक अधिकारों की जीत है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की एक मिसाल भी बन गया है।
घटना की पृष्ठभूमि
सांचौर तहसील के गांव तेतरोल निवासी गवारिया समाज के कुछ परिवारों को हाल ही में उनके ही निवास स्थान से बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इससे समुदाय में रोष फैल गया और उन्होंने प्रशासन से लगातार आग्रह किया कि उन्हें उनके पारंपरिक और वर्तमान निवास से न हटाया जाए।
जब प्रशासन से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तब घुमंतू जाति प्रदेशाध्यक्ष नारायण नाथ कालबेलिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने कलेक्टर कार्यालय, जालोर का रुख किया और ज्ञापन सौंपा।
धरना और फिर भूख हड़ताल
प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ समुदाय के लोगों ने कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना प्रारंभ किया। जब तब भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो उन्होंने 36 घंटे की भूख हड़ताल का रास्ता चुना। इस दौरान नारायण नाथ, टीकम नाथ, गोविंद, प्रह्लाद और मोहन सहित कई साथी बिना भोजन-पानी के डटे रहे।
आखिरकार प्रशासन झुका
लगातार दबाव, मीडिया कवरेज और जनता की एकजुटता के कारण प्रशासन को झुकना पड़ा। अंततः यह सहमति बनी कि गवारिया समाज के लोगों को उसी स्थान पर पुनः बसाया जाएगा, और सरकारी पट्टे देकर उन्हें उनके घरों पर वैधानिक अधिकार प्रदान किए जाएंगे।
नेतृत्व और उम्मीद की मिसाल बने नारायण नाथ
इस पूरे संघर्ष में नारायण नाथ कालबेलिया ने न सिर्फ नेतृत्व किया, बल्कि शांतिपूर्ण और संविधानसम्मत ढंग से समाज के अधिकारों की रक्षा का मार्ग दिखाया। उनके साहस, धैर्य और रणनीतिक सोच के कारण ही यह लड़ाई इतनी प्रभावशाली बनी।
उनके साथ खड़े साथी टीकम नाथ, गोविंद, प्रह्लाद और मोहन ने हर मोर्चे पर साथ दिया और यह साबित किया कि सामूहिक नेतृत्व और जमीनी स्तर की एकजुटता ही किसी भी अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
यह सिर्फ एक समुदाय की नहीं, पूरे समाज की जीत है
गवारिया समाज की इस लड़ाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि आवाज़ संगठित और शांतिपूर्ण हो, तो व्यवस्था को बदलने पर मजबूर किया जा सकता है। यह जीत उन सभी हाशिये के समुदायों के लिए उम्मीद की एक लौ है जो अब भी अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं।

📍 स्थान: कलेक्टर कार्यालय, जालोर

