मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिस परिवार का मुखिया समझदार होता है, उस परिवार की एकता को कोई नहीं तोड़ सकता । एक सुखी परिवार वही होता है जिसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता । अक्सर आज हर आदमी स्वार्थी हो गया है। परिवारों की एकता खण्डित हो रही है, संस्कार खत्म हो रहे हैं, परंतु परिवार के मुखिया की हमेशा दिली तमन्ना रहती है कि उसका परिवार एकजुट रहे, परिवार में सुख-शांति कायम रहे, परंतु घरेलू परिस्थितियों के कारण वह परिवार को एकजुट रखने में विवश हो जाता है।
*जिस घर में एकता नहीं होती, उस घर में सामंजस्य का अभाव, कलह, संकट, भेदभाव और एक दूसरे की भावनाओं का तिरस्कार बना रहता है, वहीं जिस परिवार में एकता बनी रहती है, वह परिवार जीवन की सभी चुनौतियों का सरलता से सामना करते हुए उन्नति की ओर अग्रसर होता है । जिस प्रकार से कागजों को एक साथ जोड़े रखने के लिए पिन ही कागजों को चुभती है, ठीक इसी प्रकार आज के परिवर्तनशील माहौल में परिवार को वहीं व्यक्ति चुभता है, जो परिवार को जोड़कर रखने का भ्रसक प्रयास करता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

