
मूकनायक/ कमलेश लवहात्रै
बिलासपुर छत्तीसगढ़
अपने माता – पिता का अनुकरण करते हुए अम्बेडकर नगर उरला,दुर्ग निवासी साक्षी बौद्ध सविता बौद्ध “संकल्पी” और महेंद्र बौद्ध की इकलौती संतान है। जो इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक में एम. ए. फाइनल की नियमित विद्यार्थी है। बेटी अपनी मां सविता बौद्ध संकल्पी को 2012 से लोगों में मरणोपरांत देहदान एवं अंगदान के लिए जागरूकता अभियान चलाते और देहदान करवाते हुए देख बहुत प्रभावित हुई। मां का कथन कि जीते जी तो हम दूसरों के काम आते ही है किन्तु मरने के बाद भी हमारा ये शरीर उपयोगी बन जाए तो जन्म सार्थक हो जाएगा । कल को किसने देखा है जो भी है वो आज है । युवा मस्तिष्क पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। 29 जून 2025 को धमतरी में एक सामाजिक धम्म संगोष्ठी में दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ को मरणोपरांत देहदान की वसीयत सौंपी। जिसका उद्देश्य कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामवासियों को देहदान के लिए जागरूक करना है। विंग ने प्रशस्ति पत्र देकर बेटी को सम्मानित किया । इसके साथ ही विंग की संस्थापक सविता बौद्ध संकल्पी ने 2015 में देहदान की घोषणा करने वाले सुलोचना बौद्ध और सुनीता बौद्ध को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मरणोपरांत साक्षी बौद्ध के पार्थिव शरीर को एनाटॉमी रायपुर को मेडिकल के विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु सौंपा जाएगा । इस अवसर पर जयश्री बौद्ध, डॉ. सरोज बौद्ध, अल्का बौद्ध,वंदना बौद्ध,ज्योति बौद्ध,करुणा भालाधरे ,साधना मेश्राम और रश्मि भरत शेल्लारे ,वर्षा वैद्य ,वीरेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

