Thursday, February 26, 2026
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मन में उमंग हो तो वृद्धावस्था के हर पड़ाव पर भी रंगीन है जिंदगी

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के परिवर्तनशील माहौल में अक्सर संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है । बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर के सिलसिले में घर से दूर प्रवास कर रहे हैं । ऐसी स्थिति में अकेलेपन की समस्या बढ़ती उम्र के अभिभावकों को झेलनी पड़ रही है । इस विकट समस्या से निपटने के लिए एक ही कारगर उपाय है कि आप स्वयं को शरीर के सामर्थ्य अनुसार सक्रिय रखें क्योंकि अपने आपको अधिक से अधिक सक्रिय रखना ही बुढ़ापे की समस्याओं का एकमात्र हल है । किसी शौक में अपने मन को लगाइए, खासकर वे शौक जिन्हें घर गृहस्थी के दबाव के नीचे आप जिंदगी भर पूरा नहीं कर सके हैं।
जिंदगी बहुत खूबसूरत है, परंतु बढ़ती उम्र के साथ सुंदरता चेहरे से हृदय में उतर जाती है। वहीं चिकित्सा से स्वास्थ्य संबंधी सुविधा से वरिष्ठ नागरिकों की सोच और दृष्टिकोण में सकारात्मकता दिख रही हैं जिसके फलस्वरूप अब वे जिंदगी को गर्मजोशी के साथ बसर करना चाहते हैं। वृद्धावस्था में यदि आप प्रसन्न हैं तो हर गम कम है और खुश रहने के लिए जीवन में उल्लास को बनाए रखना होगा । यदि आप प्रसन्न हैं तो अपने आसपास का माहौल भी स्वत: प्रसन्न रहेगा और उदासी व अकेलापन भी महसूस नहीं होगा क्योंकि मन में उमंग हो तो वृद्धावस्था के हर पड़ाव पर जिंदगी रंगीन है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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