मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
आए प्रकृति का गुणगान भर न करें
करें अनुरक्षण
हम दो और हमारे दो की तरह
दो वृक्षों का रोपण करें
जब तक प्रकृति में हरियाली है
तब तक हर घर हर दिन दिवाली है
आए प्रकृति का गुणगान भर न करें
दो वृक्षों का रोपण करें
आज मुझे वह खुशी मिल रही
जिंदगी की स्वांसे स्वच्छ मिल रही
जो मैंने चार वर्ष पहले बीजारोपण
किया था विद्यालय के आंगन में
लहलहा रहा है
मानों वृक्ष कुछ जीवंत होने का
प्रमाण दे रहा है
हैं सुकून भरी जेठ मास दोपहरी
आए प्रकृति का गुणगान भर न करें
हम दो और हमारे दो का नाता जोड़े
दो वृक्षों का रोपण अवश्य करें।।
जब तक यह पौधों की हरियाली है
तब तक घर घर हर दिन दिवाली है
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भारत दास “कौन्तेय” सतना मध्यप्रदेश

