मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सभी मनुष्यों का स्वभाव एक जैसा नहीं होता। अंदर के भाव के अनुसार स्वभाव भी बदलता है क्योंकि भावनाएं ही तो इंसान को इंसान बनाती है । भावनाएं हैं तो रिश्ते हैं, प्रेम है। भावना ना हो तो इंसान सुख, दुख, चिंता, परेशानी, क्रोध, उत्साह, प्रेम, नफरत सबसे मुक्त हैं। हमारी भावनाएं ही हमारे विचार और व्यवहार को तय करती है। यह हमारी बुद्धि पर राज करती हैं। गलत संगत के चलते इंसान के संस्कार और स्वभाव बदलते नहीं है। यदि स्वभाव बदलना मुश्किल है तो हम अपने व्यवहार में तो परिवर्तन जरूर ला सकते हैं। व्यवहार में सकारात्मकता आते ही हमारा व्यक्तित्व निखर उठता है। इसलिए स्वभाव चाहे कैसा भी हो, व्यवहार हमेशा सही रखें क्योंकि दुनिया हमारा आचरण देखकर ही हमारी तरफ बढ़ती है। व्यवहार किसी को दोस्त भी बना सकता है और किसी को विरोधी । हम लोगों के साथ किस तरह मिलते-जुलते हैं, बात करते हैं, इसके आधार पर ही लोग हम पर प्यार लुटाएंगे।
जिस इंसान को उसकी भावनाएं नियंत्रित करती है वह हर रोज नई-नई मुसीबतों का सामना करता है । भावनाओं में बह कर लिए गए फैसले बहुत बार दुखदाई साबित होते हैं । हमारी भावनाएं हमारे रोजमर्रा के कार्यों को संचालित करती है। भावनाओं के बिना हम अपने जीवन को अनुभव ही नहीं कर सकते। महसूस ही नहीं कर सकते। हमारी भावनाएं ही हमें अच्छा और बुरा इंसान बनाती है । इसलिए जरूरी है कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए हम सकारात्मक भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें क्योंकि नकारात्मक भावनाएं हमें शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग बनाती है। जिस प्रकार हमारा करोड़ों का घर एक छोटे से ताले और चाबी पर निर्भर रहता है। उसी तरह हमारा व्यक्तित्व भी हमारी सोच और स्वभाव पर निर्भर करता है। सोच हमारा मन है और व्यवहार हमारा कर्म। हमारे स्वभाव से हमारी पहचान बनती है। हमारा स्वभाव जैसा होता है, हमारा मन भी वैसा होता है और हम वैसा ही व्यवहार और कर्म करते हैं।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

